लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान को न्यायपालिका से एक बड़ी राहत मिली है। लखनऊ की एमपी/एमएलए सेशन कोर्ट ने दो अलग-अलग पासपोर्ट रखने के मामले में अब्दुल्ला आजम को सुनाई गई सात साल की सजा को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने अब्दुल्ला आजम की ओर से निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील को स्वीकार करते हुए यह अहम निर्णय सुनाया। गौरतलब है कि इस मामले में एमपी/एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले साल 5 दिसंबर 2025 को उन्हें दोषी ठहराते हुए सात साल कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस अपील पर बीते 25 मई को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए सजा निरस्त करने का आदेश जारी किया।
यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई को रामपुर के सिविल लाइंस थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथि का उल्लेख करते हुए दो फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाए थे। इनमें से एक पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी, तथा इन दोनों ही पासपोर्टों का उपयोग विदेश यात्राओं के लिए किया गया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद जहां मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपों को सही पाया था, वहीं अब सेशन कोर्ट ने इस सजा को खारिज कर सपा खेमे को बड़ी राहत दी है।
अदालत से मिली इस कानूनी जीत के बावजूद अब्दुल्ला आजम खान के तुरंत जेल से बाहर आने की राह में अभी कई अड़चनें बाकी हैं। दो पासपोर्ट मामले में राहत मिलने के बाद भी वह फिलहाल रामपुर जेल में ही बंद रहेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ कुछ अन्य गंभीर मामले अभी भी देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इन मामलों में अभी कानूनी सुनवाई और प्रक्रिया जारी है, जिसके कारण जब तक उन मामलों में भी राहत या जमानत नहीं मिल जाती, तब तक अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई संभव नहीं हो पाएगी।





