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बहुपक्षीयता ऐसे अवसरों पर खरी नहीं उतरी, जब इसकी सबसे ज्यादा मांग थी : जयशंकर

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के विविध क्षेत्रों में कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व चुनौतियों का जिक्र करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि बहुपक्षीयता ऐसे अवसरों पर खरी नहीं उतरी, जब इसकी सबसे अधिक मांग थी। आसियान-भारत नेटवर्क थिंक टैंक के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया अब पहले जैसी कभी नहीं रहेगी और महामारी का प्रभाव हमारी समग्र कल्पना से परे होगा।

विदेश मंत्री ने कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, वर्तमान अनुमानों के अनुसार समग्र नुकसान 5800 से 8800 अरब डॉलर (5.8-8.8 ट्रीलियन डॉलर) या वैश्विक जीडीपी का करीब 6.5 से 9.7 प्रतिशत के बीच रखा गया है। (1929की) महामंदी के बाद निश्चित तौर पर दुनिया की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े सिकुडऩ का अनुमान व्यक्त किया गया है।

उन्होंने कहा कि महामारी के कारण जीवन और आजीविका को वास्तव में किस हद तक नुकसान हुआ है, वह अभी अस्पष्ट है। दुनिया की उभरती स्थिति के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि महामारी ने मानव अस्तित्व से जुड़े अदृश्य आयाम को सामने लाने का काम किया है, जो वैश्वीकरण के संदर्भ में है। साथ ही नई चुनौतियों ने समग्र समाधान निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अधिक गंभीरता से साथ मिलकर काम करने की जरूरत को रेखांकित किया है।

उन्होने कहा, विशुद्ध राष्ट्रीय प्रतिक्रिया या कभी-कभी इंकार की स्थिति में रहने की सीमाएं भी स्पष्ट हैं। इसलिए, समग्र समाधान निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अधिक गंभीरता से साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। विदेश मंत्री ने कहा, विडंबना यह है कि बहुपक्षीयता की जब सबसे अधिक मांग रही तब ऐसे अवसरों पर यह खरी नहीं उतरी। अगर हमने कम नेतृत्व देखा, तो यह सिर्फ मुख्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कालभ्रमित प्रकृति के कारण नहीं था।

गौरतलब है कि दुनिया में कोरोना वायरस से 2.2 करोड़ लोग संक्रमित हुए हैं और 7,80,000 लोगों की मौत हुई है तथा कई देशों की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान भी हुआ है। भारत में कोविड-19 से 28 लाख लोग संक्रमित हुए हैं तथा 53,800 लोगों की मौत हुई है। अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि वर्तमान स्थिति भी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय राजनीति के घोर प्रतिस्पर्धी स्वरूप को प्रदर्शित करती है।

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