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डॉ.दरबारी लाल अस्थाना स्मृति सम्मान से अलंकृत होंगी डॉ.दिव्या श्रीवास्तव

यह आयोजन दयानंद इंटर कॉलेज परिसर में 25 जुलाई को होगा
दयानंद कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ.दिव्या श्रीवास्तव को दिया जाएगा स्वतंत्रता सेनानी डॉ.दरबारी लाल अस्थाना स्मृति सम्मान-2026
यह आयोजन कॉलेज परिसर में 25 जुलाई को सुबह 11 बजे से होगा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना की जयंती के अवसर पर शनिवार 25 जुलाई 2026 को विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रभक्ति पर आधारित प्रेरक समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस साल यह लखनऊ के महानगर स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज परिसर में होगा। इसमें दयानंद कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ.दिव्या श्रीवास्तव को उल्लेखनीय शैक्षणिक सेवाओं के लिए डॉ. दरबारी लाल अस्थाना स्मृति जयंती सम्मान 2026 से अलंकृत किया जाएगा। इस अवसर पर लोकप्रिय नृत्य कलाकार रत्ना अस्थाना के निर्देशन में देशभक्ति पर आधारित नृत्य प्रस्तुति वंदे मातरम् नृत्योत्सव प्रस्तावित है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र, उत्तर प्रदेश के विधायक, ओ.पी. श्रीवास्तव आमंत्रित किये गए हैं।
कार्यक्रम संयोजिका शुभ्रा अस्थाना ने बताया कि दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या मूल रूप से वाराणसी की निवासी हैं। बीए एमए, बीएड में हर वर्ष अपने कॉलेज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडलिस्ट रहीं हैं। खेल में भी विशेष अभिरुचि होने के कारण वॉलीबॉल में नेशनल लेवल तक खेला एवं उत्तर प्रदेश की कप्तान भी रही हैं। इसके अतिरिक्त कबड्डी और बास्केटबॉल में भी अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में भी सफलतापूर्वक प्रतिभाग किया है। उच्च अंक प्राप्त होने के कारण मेरिट से इनका चयन वर्ष 1998 में शिक्षिका के तौर पर लखनऊ में हुआ लगभग 22 वर्षों तक शैक्षिक कार्य करते हुए इनका पुन: वर्ष 2019 में प्रधानाचार्या पद पर चयन किया गया है।
स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना के पुत्र और वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना ने बताया कि सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी दर्शनशास्त्री डॉ.दरबारी लाल अस्थाना ने अपना पूरा जीवन देश सेवा और समाज सेवा को अर्पित कर दिया था। डॉ.दरबारी लाल अस्थाना की माता जी का नाम राज रानी देवी और पिता का नाम मुकुंद लाल अस्थाना था जिनकी आप इकलौती संतान थे। उनका जन्म 24 जुलाई 1905 को आगरा में हुआ था। डॉ.दरबारी लाल अस्थाना का राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश अंग्रेजी हुकूमत के दौरान राजकीय कॉलेज आगरा के बहिष्कार के साथ शुरू हुआ था। वृन्दावन स्थित सुप्रसिद्ध प्रेम महाविद्यालय में उन्होंने ग्रामोत्थान का कार्य किया और ब्रज के अनेक गांवों का दौरा कर आम लोगों में आजादी और राष्ट्रीयता की भावना जगायी। डॉ.दरबारी लाल अस्थाना को ग्रामीण अर्थशास्त्र और पुनर्निर्माण कार्य का विशेष अध्ययन करने के लिये गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर के विश्वविख्यात शान्तिनिकेतन भी भेजा गया था। वहां गुरुदेव ने उन्हें एक कलम भी आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया था। युसुफ मेहर अली द्वारा संचालित अखिल भारतीय युवक आन्दोलन के संचालन में भी डॉ.दरबारी लाल अस्थाना सक्रिय रहे थे। सिंधियों के महान आध्यात्मिक गुरु श्रीयुत टी.एल.वासवानी का सानिध्य भी डॉ.दरबारी लाल अस्थाना को प्राप्त हुआ था। महात्मा गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन में डॉ.दरबारी लाल अस्थाना काफी सक्रिय रहे थे। इस दौरान 1930 में वृंदावन के प्रेम महाविद्यालय के छात्रों के साथ जब वह सत्याग्रह आन्दोलन कर रहे थे तब उन्हें 9सी-12 धारा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। 4 अगस्त 1930 को डॉ.दरबारी लाल अस्थाना को छह महीने के कठोर कारावास का दंड सुनाया गया था। 11 अक्टूबर 1930 में उन्हें मथुरा जेल से सीतापुर जेल में ट्रांसफर कर दिया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद डॉ.दरबारी लाल अस्थाना ने देहरादून में रहकर मेडिकल प्रैक्टिस आरंभ की। इसके बाद वह लखनऊ आ गए और 1954 से उन्होंने उत्तर प्रदेश गांधी स्मारक निधि लखनऊ केंद्र के संचालक के रूप में लम्बे समय तक कार्य किया। प्रदेश के प्रखर प्रवक्ता, क्रान्तिकारी समाज सुधारक और संगठनकर्ता रहे डॉ.दरबारी लाल अस्थाना काफी समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे थे। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी का स्वर्गवास 3 मार्च 1985 को लगभग 80 वर्ष की आयु में हो गया था। डॉ.दरबारी लाल अस्थाना बच्चों को बहुत प्यार करते थे और उन्हे देश-प्रेम, आत्म सम्मान तथा सद्कार्यो के लिये सदैव प्रेरित करते थे। स्वतंत्रता के पच्चीसवें वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 15 अगस्त 1972 को ताम्रपत्र से सम्मानित किया था।

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