नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की कानूनी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह बनता है और आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सुकेश चंद्रशेखर, लीना मारिया पॉल और जैकलीन फर्नांडिस समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 के तहत आरोप (चार्ज फ्रेम) तय करने का आदेश दिया है, जिसकी सजा धारा 4 के तहत निर्धारित है। अदालत ने आरोपों पर औपचारिक हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया के लिए मामले को 3 जून को सूचीबद्ध किया है और सभी आरोपियों को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का कड़ा निर्देश जारी किया है।
यह पूरा मामला जाने-माने व्यवसायी शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये की उगाही से जुड़ा हुआ है, जिसमें दिल्ली पुलिस की एफआईआर के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। हालांकि जैकलीन फर्नांडिस इस उगाही के मूल मामले में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, लेकिन ईडी की जांच में नाम आने और तोहफे लेने के आरोपों के बाद उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाया गया था। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी जैकलीन की उस याचिका को खारिज कर चुका है, जिसमें उन्होंने ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी।
इस मामले के मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत भी आरोप तय करने का आदेश दिया गया है। फिलहाल सुकेश चंद्रशेखर न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है, जबकि लीना मारिया पॉल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में तो जमानत मिल चुकी है लेकिन मकोका मामले में उनकी अर्जी खारिज हो चुकी है। हाल ही में जैकलीन फर्नांडिस ने इस मामले में सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की अपनी अर्जी वापस ले ली थी, जिसके बाद अब 3 जून को अदालत में उनके खिलाफ आरोपों पर औपचारिक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।





