प्रदोष व्रत को करने पर शनि संबंधी दोष दूर होंगे
लखनऊ। सनातन परंपरा में भगवान शिव को कल्याण का देवता माना जाता है जो सबसे जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्त पर कृपा बरसाते हैं। औढरदानी कहे जाने वाले भगवान भोलेनाथ की तरह उनकी साधना भी बेहद सरल है। हिंदू धर्म में शिव साधना के लिए जिस प्रदोष व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है, जून महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का क्या धार्मिक महत्व है? किस प्रदोष व्रत को करने पर वैवाहिक सुख की प्राप्ति और किस प्रदोष व्रत को करने पर शनि संबंधी दोष दूर होंगे,हिंदू धर्म में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर औघड़दानी कहलाने वाले भगवान शंकर के लिए प्रदोष व्रत रखने का विधान है. पंचांग के अनुसार सूर्यास्त और रात्रि का संधिकाल प्रदोष कहलाता है. जिस प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है, वह जून महीने में पहली बार 12 तारीख को पड़ेगा. पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 की शाम 07:36 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 13 जून 2026 की शाम 04:07 बजे तक रहेगी। ऐसे में यह प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार 12 मई 2026 को शुक्रवार का दिन रहेगा, इसलिए देवों के देव महादेव से जुड़ा यह व्रत शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा. भगवान शिव संग माता पार्वती की पूजा के लिए जिस शुक्र प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम माना जाता है, उसकी प्रदोषकाल की पूजा सायंकाल 07:36 से रात्रि 09:20 बजे तक की जा सकेगी।
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन पड़ने वाले शुक्र प्रदोष व्रत को विधि-विधान से करने पर साधक को शिव कृपा से जीवन से सभी सुख भोगने का सौभाग्य प्राप्त होता है. शुक्र प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति के जीवन हमेशा धन-संपदा बनी रहती है और वह सुखी वैवाहिक जीवन जीता है. हिंदू मान्यता के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी माना गया है.
इन बातों का रखें ध्यान
प्रदोष व्रत के दिन भूलकर भी लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में ही महादेव की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। विशेष चीजों के द्वारा शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। व्रती को दिन में भी सोने से बचना चाहिए। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ और मंत्रों का जप करना चाहिए। मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान जरूर करें। व्रत के दौरान मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए। इस दिन काले रंग के कपड़े भूलकर भी नहीं पहनने चाहिए। इससे नकारात्मकता आती है। इसके अलावा किसी से वाद-विवाद न करें।
प्रदोष व्रत विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान इत्यादि से निवित्र होकर शिव पूजा प्रारंभ कर देना चाहिए। पूजा स्थल को गंगा जल से धुलकर पहले पवित्र कर लें। पूजा स्थल पे ही एक मंडप बना लें और पांच रंगों से रंगोली बनाकर एक दीपक जला दें। कुश का आसन हो तो सबसे अच्छा है। पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाना चाहिए। भगवान शिव का पार्थिव बनाकर रुद्राभिषेक या जलाभिषेक करें। व्रत फलाहार रहना है। इस दिन संभव हो तो मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल जरूर चढ़ाएं साथ ही बेलपत्र भी अर्पित करें। शाम में फिर से स्नान करके भगवान शिव की पूजा करें और प्रदोष व्रत कथा सुनें। अंत में आरती करके भगवान को भोग लगाएं।





