भयानक महामारी बनकर संपूर्ण मानव समाज को घुटनों के बल कर देने वाला कोरोना वायरस से सब कुछ दांव पर लगाकर लड़ रहे अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए और बीते तीन माह से पूरी दुनिया में भय, आशंका व अनिष्ट का पर्याय बनी इस महामारी के खिलाफ देशवासियों में जोश भरने के लिए प्रधानमंत्री की अपील पर पूरे देश ने रात्रि में 9 बजे अपने घरों की लाइटें बंद करके दीया, मोमबत्ती और फ्लैश लाइट जलाकर जिस तरह राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन किया गया, उससे न सिर्फ अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं की हौसला अफजाई हुई है बल्कि नेतृत्व के प्रति एक समर्थन भी व्यक्त किया गया कि संकट की इस घड़ी में देश सरकार के फैसलों के साथ खड़ा है।
दुनिया में पहले भी महामारियां आती रही हैं और लाखों, करोड़ों लोग उसके शिकार भी बनते रहे हैं। ब्लैक डेथ, स्पेनिश फ्लू, ग्रेट कालरा, ताऊन जैसी तमाम महामारियां आयीं लेकिन अंतत: मानव समाज महामारियों की अग्नि परीक्षा में और अधिक कुंदन बनकर निकला है। महामारियों के कारण दुनिया भर में अनुसंधान बढ़े हैं, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं जिसका सकारात्मक परिणाम है कि कोविड-19 पेंडमिक भले ही अपने फैलाव की दृष्टि से बहुत भयानक हो, लेकिन मृत्यु दर में यह पहले की तमाम महामारियों की तुलना में बहुत कम है।
इसका कारण यह है कि दुनिया दिनोंदिन प्रगति कर रही है और आज वैज्ञानिक इतने सक्षम हैं कि कोरोना की काट दो-चार महीनों में जरूर दूंढ लेंगे और अंतत: यह महामारी भी मारी जायेगी। जब तक इस महामारी की दवा का इजाद नहीं हो जाता है, कारगर प्रतिरक्षण वैक्सीन का विकास नहीं हो जाता, तब तक तो हमारी सावधानी ही बचाव और एकमात्र विश्वसनीय इलाज है।
ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार राष्ट्रीय संबोधनों में लोगों को आगाह करना, प्रतीकों के माध्यम से देशवासियों में हौसला भरना और महामारी से लड़ रहे योद्धाओं का सम्मान करना और उनके प्रति राष्ट्र की एकजुटता दिखाना यह बताता है कि सरकार न सिर्फ महामारी से लड़ने का प्रयास कर रही है बल्कि जनमानस भी सरकार के कदमों के साथ पूरी दृढ़ता और एकजुटता से खड़ा है। अपने घरों, खिड़कियों और दरवाजों पर नौ मिनट की रौशनी सरकार और महामारी से सीधे लड़ रहे लोगों को संबल प्रदान करती है और यह बहुत जरूरी भी है।
पीएम ने 22 मार्च को शाम पांच बजे पांच मिनट तक थाली, घंटी आदि बजाकर महामारी के खिलाफ और योद्धाओं के समर्थन में देश की एकजुटता प्रदर्शित करने का अनुरोध था, तब देश ने इसका खुले मन से स्वागत और समर्थन किया। इसके बाद लॉकडाउन किया गया और तमाम तकलीफों के बावजूद एक समय कोरोना की वृद्धि पर नियंत्रण दिखने लगा था, लेकिन उसके बाद की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने हमारी लड़ाई को अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम सरकार और स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल बनाये रखें और पूरी सतर्कता से इसे हराने में हर संभव योगदान करें।





