11 की उम्र से लिख रही हैं किताबें
लखनऊ। यह हकीकत है कि बुलंद हौसलों के आगे उम्र और शिक्षा बाधा नहीं बनते। इंदिरा चौक निवासी 17 वर्षीय सुहानी सिंह ने अपनी इच्छाशक्ति और मेहनत के दम पर वो मिशाल कायम की है, जो दृढ़ संकल्प और जज्बे का सीधा प्रमाण है। यहां तक पहुंचने के लिए बहुत से लोगों को वर्षों बीत जाते हैं लेकिन उन्होंने मात्र 11 साल की उम्र में अंग्रेजी में कविताएं लिखना शुरू कर दी थीं। तब वह कक्षा छह की छात्रा थीं और परिवार का हमेशा सहयोग भी मिलता रहा। वह ऊंचाइयों तक पहुंचती रहीं। अब तक उनकी अंग्रेजी में दो किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और तीन कविताएं राष्ट्रीय स्तर पर भी चयन हो चुकी हैं। शहर में इंदिरा चौक निवासी सुहानी सिंह 12 वीं की छात्रा हैं। वह शहर के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत हैं। उनके पिता प्रशांत सिंह जिला कोआपरेटिव बैंक के मैनेजर हैं। मां मानवी सिंह गृहणी हैं।
सुहानी सिंह कहती हैं कि वह वर्ष 2020 में कक्षा छह की छात्रा थीं। तब उनकी उम्र मात्र 11 साल थी। उस वक्त उन्हें अंग्रेजी में कविताएं पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। उनकी रुचि लगातार बढ़ रही थी और जब वह अंग्रेजी में कविताएं पढ़ती थीं तो उन्हें ऐसा लगता था कि यह कविताएं वह स्वयं भी लिख सकती हैं। उन्होंने 11 साल की उम्र में ही कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। वर्ष 2024 में उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके साथ-साथ उन्होंने अंग्रेजी में 30 कविताएं लिख दीं। मार्च 2024 में उनकी पहली किताब वर्ल्ड फुल आॅफ एलिक्सिर प्रकाशित हुई। उन्होंने अपना हौसला लगातार बनाए रखा और कविताएं लिखती रहीं। पिछले दिनों फरवरी 2024 में 30 कविताओं की दूसरी किताब व्हिस्पर्स आफ एगोनी प्रकाशित हुई। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक आनलाइन प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें देश भर के लोगों ने अपनी अपनी कविताएं सुनाईं थीं। उस प्रतियोगिता में उनकी तीन कविताओं का चयन हुआ। जो राष्ट्रीय स्तर के प्रोफेसर थे, उन्होंने तीन कविताएं चुनीं और अपनी तीन किताबें प्रकाशित की। वह तीन किताबें व्हिस्पर्स आफ रेन, द डान विदिन और द लव थ्योरी हैं। सुहानी सिंह कहती हैं कि वह शुरूआत से ही कविताएं, कहानियां पढ़ने की शौकीन हैं और वह चाहती हैं कि आगे भी लगातार कविताएं लिखती रहें, जिन्हें देशभर के लोग पढ़ें।
अपनी पढ़ाई और कविताएं लिखने के साथ-साथ सुहानी सिंह चेंज मेकर्स क्लब की फाउंडर भी हैं और इस क्लब में उनकी हमउम्र लड़कियां शामिल हैं। ज्यादातर उनकी सहेलियां हैं। जब भी उन्हें मौका मिलता है, समाज सेवा करती हैं। इसमें पौधा रोपण, लोगों की मदद करना, दान देना समेत कई तरह के सामाजिक कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यह क्लब चलाने की प्रेरणा उन्हें अपने मामा डा. प्रशांत चौहान से मिली। उन्होंने ही क्लब की शुरूआत कराई। सुहानी सिंह कहती हैं कि उनकी दोनों किताबें केवल बदायूं या भारत देश में ही नहीं मारीशस, नाइजीरिया, कनाडा, अफगानिस्तान, फिजी समेत कई देशों में गई हैं।





