back to top

जीवन और मृत्यु

एक फकीर तिब्बत में मारपा। उस फकीर के पास कोई गया और उसने कहा, अगर जीवन के संबंध में पूछना हो, तो जरूर पूछो, क्योंकि जीवन का मुझे पता है। रही मृत्यु, तो मृत्यु से आज तक कोई मिलना नहीं हुआ, मेरी कोई पहचान नहीं है। मृत्यु के संबंध में पूछना हो, तो उनसे पूछो जो मरे हुए हैं या मर चुके हैं। मैं तो जीवन हूं, मैं जीवन के संबंध में बोल सकता हूं, बता सकता हूं। मृत्यु से मेरा कोई परिचय नहीं। जीवन है जहां, वहां मृत्यु कैसे आ सकती है! या तो जीवन है ही नहीं, और या फिर मृत्यु नहीं है। दोनों बातें एक साथ नहीं हो सकतीं। हम जीवित हैं, लेकिन हमें पता नहीं कि जीवन क्या है?

इस अज्ञान के कारण ही हमें ज्ञात होता है कि मृत्यु भी घटती है। मृत्यु एक अज्ञान है। जीवन का अज्ञान ही मृत्यु की घटना बन जाती है। काश! उस समय जीवन से परिचित हो सकें जो भीतर है, तो उसके परिचय की एक किरण भी सदा-सदा के लिए इस अज्ञान को तोड़ देती है कि मैं मर सकता हूं, या कभी मरा हूं, या कभी मर जाऊंगा। लेकिन उस प्रकाश को हम जानते नहीं है जो हम हैं, और उस अंधकार से हम भयभीत होते हैं जो हम नहीं हैं। उस प्रकाश से परिचित नहीं हो पाते जो हमारा प्राण है, जो हमारा जीवन है जो हमारी सत्ता है और उस अंधकार से हम भयभीत होते हैं, जो हम नहीं हैं।

मनुष्य मृत्यु नहीं है, मनुष्य अमृत है। लेकिन हम अमृत की ओर आंख नहीं उठाते है। हम जीवन की तरफ, जीवन की दिशा में कोई खोज ही नहीं करते हैं, एक कदम भी नहीं उठाते हैं। जीवन से रह जाते हैं अपरिचित और इसलिए मृत्यु से भयभीत प्रतीत होते हैं। इसीलिए प्रश्न जीवन और मृत्यु का नहीं है, प्रश्न है सिर्फ जीवन का। मुझे कहा गया है कि मैं जीवन और मृत्यु के संबंध में बोलूं। यह असंम्भव है बात। प्रश्न तो है सिर्फ जीवन का और मृत्यु जैसी कोई चीज ही नहीं है। जीवन ज्ञात होता है, तो जीवन रह जाता है। और जीवन ज्ञात नहीं होता, तो सिर्फ मृत्यु रह जाती है।

जीवन और मृत्यु दोनों एक साथ कभी भी समस्या की तरह खड़े नहीं होते। यह तो हमें पता ही है कि हम जीवन है, तो फिर मृत्यु नहीं है। और या हमें पता नहीं है कि हम जीवन हैं, तो फिर मृत्यु ही है, जीवन नहीं है। ये दोनों बातें एक साथ मौजूद नहीं होती हैं, नहीं हो सकती हैं। लेकिन हम सारे लोग मृत्यु से भयभीत हैं। मृत्यु का भय बताता है कि हम जीवन से अपरिचित हैं। मृत्यु के भय का एक ही अर्थ है-जीवन से अपरिचय। और जीवन हमारे भीतर प्रतिपल प्रवाहित हो रहा है-श्वास-श्वास में, कण-कण में, चारों ओर, भीतर-बाहर सब तरफ जीवन है और उससे ही हम अपरिचित हैं।

RELATED ARTICLES

संस्मरणों पर आधारित पुस्तक मंच के प्रपंच का विमोचन

लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम, लखनऊ इकाई (अवध प्रांत) की ओर से कवि कमलेश मौर्य मृदु की मंचीय संस्मरणों पर आधारित पुस्तक मंच के प्रपंच...

धूमधाम से निकली शिरडी साईं पालकी यात्रा

लखनऊ। साईं आश्रम ट्रस्ट लखनऊ के तत्वावधान में 22 अगस्त को वार्षिक भव्य शिरडी साईं पालकी यात्रा पूरे हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। दोपहर...

तीज किंग काव्यांश व क्वीन बनीं विनीता

लखनऊ। पद्मश्री योगेश प्रवीन कल्चरल क्लब के तत्वावधान में आज श्रावण महोत्सव का भव्य आयोजन विवेकानंद हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम मेंलोकगीत लोक...

संस्मरणों पर आधारित पुस्तक मंच के प्रपंच का विमोचन

लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम, लखनऊ इकाई (अवध प्रांत) की ओर से कवि कमलेश मौर्य मृदु की मंचीय संस्मरणों पर आधारित पुस्तक मंच के प्रपंच...

धूमधाम से निकली शिरडी साईं पालकी यात्रा

लखनऊ। साईं आश्रम ट्रस्ट लखनऊ के तत्वावधान में 22 अगस्त को वार्षिक भव्य शिरडी साईं पालकी यात्रा पूरे हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। दोपहर...

कल होगा भोलेनाथ का भव्य बर्फ का शृंगार

लखनऊ। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी डालीगंज ढलाईघर स्थित भोलेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को बाबा भोलेनाथ का भव्य बर्फ का श्रृंगार...

तीज किंग काव्यांश व क्वीन बनीं विनीता

लखनऊ। पद्मश्री योगेश प्रवीन कल्चरल क्लब के तत्वावधान में आज श्रावण महोत्सव का भव्य आयोजन विवेकानंद हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम मेंलोकगीत लोक...

नोएडा में हाईटेक डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन, राजनाथ बोले- अब जांच होगी ज्यादा सटीक

नोएडा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र सभागार में महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर...

चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एथेनॉल नहीं है कारण, गन्ने का कम उत्पादन और रिकवरी का है असर: कृषि विशेषज्ञ

नई दिल्ली। देश भर में चीनी की कीमतों में आई तेजी को लेकर चल रही बहस के बीच कृषि और चीनी उद्योग से जुड़े...