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कोविड, करप्शन व क्लाइमेट बना चुनावी मुद्दा

अमेरिका में 66 मिलियन से अधिक लोग अपने मत का प्रयोग कर चुके हैं। इसका अर्थ यह है कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में जो कुल मतदान हुआ था, उसका लगभग 50 प्रतिशत मतदान हो चुका है। इसकी समीक्षा करते हुए अधिकतर विशेषज्ञों का अनुमान है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जबरदस्त शिकस्त मिल सकती है। शायद इसका अंदाजा ट्रम्प को भी है, तभी उन्होंने मतदान कर चुके मतदाताओं से अपील की है कि वह अपने वोट को उनके पक्ष में बदल दें।

अमेरिका में कुछ राज्य मतप्रयोग के बाद राय को बदलने का अधिकार देते हैं। इनमें विस्कांसिन व मिशिगन भी शामिल हैं, जिनमें 2016 में ट्रम्प बामुश्किल ही जीत पाए थे। लेकिन कुछ राज्य, जैसे फ्लोरिडा, नार्थ कैरोलिना, अरिजोना आदि अपने मतदातों को यह अधिकार नहीं देते हैं यानी एक बार वोट डालने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता। बहरहाल, ट्रम्प की अपील से यह आशंका बढ़ गई है कि 3 नवम्बर का चुनावी फिनाले अव्यवस्थित, संभवत: अनिर्णयात्मक और विवादित भी हो सकता है।

दरअसल, बर्र के छत्ते में ट्रम्प ने ही पत्थर मारकर हंगामा खड़ा किया है। उन्होंने ट्वीट किया- ‘दूसरे डिबेट के फौरन बाद से ही (गूगल पर) जबरदस्त ट्रेंड चल रहा है कि क्या मैं अपना वोट बदल सकता हूं? इसका संदर्भ मेरे पक्ष में (वोट) बदलने को लेकर है। अधिकतर राज्यों में उत्तर हां है।’ जाओ बदल दो। यह तुम्हारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है। लेकिन इस ट्वीट में विवादित दावे हैं, वोट बदलने का ट्रेंड दस दिन पहले चला था और बहुत ही कम समय के लिए चला था, दूसरा यह कि यह थोड़े समय का ट्रेंड आवश्यक रूप से ट्रम्प के पक्ष में नहीं था।

जिन राज्यों में राय बदलने की अनुमति है, उनमें अलग अलग नियम हैं जो काउंटी के स्तर तक चले जाते हैं। मसलन, विस्कांसिन में बैलट का अधिकारिक तौर पर दर्ज होने व गिने जाने से पहले मतदाता तीन बार अपना मन बदल सकता है। लेकिन कनेक्टिकट में स्थानीय अधिकारी तय करते हैं कि मतदाता अपना मन बदल सकते हैं या नहीं। कुछ राज्य चुनाव के दिन तक वोटर्स को अपनी राय बदलने का हक देते हैं, जबकि कुछ अन्य राज्यों में वह पूर्व निर्धारित तिथि तक ही ऐसा कर सकते हैं।

कुछ संदेहजनक नियम, जिन्हें रिपब्लिकन ने अपने पक्ष में कर रखा है, हर समय हर स्तर पर पक्षपाती न्यायपालिका पुन:लिखती रहती है। एमी कोनी बैरेट की सीनेट द्वारा (52-48) जज के तौरपर नियुक्ति से, वह भी चुनाव से मात्र आठ दिन पहले, इस योजना की पुष्टि हो जाती है, जिससे रिपब्लिकन को सुप्रीम कोर्ट में 6-3 की वैचारिक बढ़त मिल जाती है। 48 वर्षीय बैरेट अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की 115वीं न्यायाधीश हैं और यह पद संभालने वाली पांचवीं महिला। 151 वर्ष के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि अल्पमत वाली पार्टी के एक भी वोट के बिना किसी न्यायाधीश की नियुक्ति की पुष्टि हुई है।

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