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सिविल अस्पताल में हार्ट मरीजों को मिल रहा आधा-अधूरा इलाज

महिमा तिवारी लखनऊ। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में हद्य रोगों के बेहतर इलाज के नाम पर करोड़ों खर्च कर दिये गये, बावजूद इसके मरीजों को सिर्फ प्राथमिक उपचार मिल रहा है। कई सालों से यहां कैथ लैब बनने की कवायद आज तक पूरी नहीं हो सकी। बीते साल शासन ने एक बार फिर इसके लिए भारी-भरकम बजट जारी किया लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

मालूम हो कि सिविल अस्पताल में हार्ट की सभी बीमारियों के इलाज के लिए कैथ लैब बनाने की कोशिशें करीब डेढ़ दशक से चल रही है। कुछ साल पहले यहां लैब तैयार भी हो गयी। करोड़ों खर्च कर मशीनें भी मंगायी गयीं। एक- दो मरीजों की एंजियोग्राफी भी की गयी। इसके बाद लैब फिर बंद हो गयी। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि लैब में चूहों का डेरा है। बीते साल एक बार फिर अस्पताल प्रशासन ने इसकी सुध ली और शासन से नया बजट मांगा। मरीजों के हितों में शासन ने कैथ लैब के लिए तीन करोड़ 89 लाख 25 हजार का बजट जारी कर दिया। इसके बावजूद कैथ लैब नहीं बन सकी।

वहीं अस्पताल में प्रतिदिन करीब हार्ट सम्बन्धी बीमारियों से ग्रसित होकर अस्पताल में रोजाना 300 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें प्राथामिक उपचार देकर केजीएमयू, पीजीआई व लोहिया संस्थान रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यहां पर अभी तक मरीजों को सिर्फ ईसीजी-ईको जांच की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल की कैथ लैब करीब छह साल से खराब पड़ी है। डा. श्रीवास्तव के अनुसार रोजाना अस्पताल की ओपीडी में करीब 250 से 300 मरीज पहुंचते हैं, इनमें से बहुत से मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी कराने के आवश्यकता होती है तो इन मरीजों को केजीएमयू, लोहिया, पीजीआई संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है।

अस्पताल के निदेशक डा नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि वर्ष 2018 तक कैथ लैब थी, लेकिन मशीन खराब हो जाने के बाद रिपेयर नहीं हो सकी। पिछले साल दिसम्बर में बजट जारी होने होने के बाद टीएमटी, इको व अन्य मशीनें लगायी गयी हैं। इनके जांच शुरू हो गयी है। जब कोई मरीज आता है तो उसकी तबियत स्थिर करने के बाद जरूरत अनुसार जांचें की जाती है। काफी मरीजों को इसी से फायदा हो जाता है। यदि किसी मरीज को एंजियोप्लास्टी व एंजियोग्राफी की आवश्यकता होती है तो उसे उच्च संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है।

क्या है कैथ लैब

कैथ लैब एक कैथीटेराइजेशन प्रयोगशाला हैं, जिसे आमतौर पर कैथ लैब के रूप में जाना जाता है। इसमें एक परीक्षण कक्ष होता है, जिसमें डायग्नोस्टिक इमेजिंग उपकरण होते हैं, जो हृदय की धमनियों और हृदय के कक्षों की कल्पना करते हैं और किसी भी स्टेनोसिस या असामान्यता का इलाज करते हैं। कार्डिएक कैथीटेराइजेशन कुछ प्रकार के हृदय रोगों के निदान और उपचार के लिए की जाने वाली एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के दौरान एक पतली लंबी ट्यूब जिसे कैथेटर कहा जाता है, धमनी या नस या कमर में डाली जाती है, फिर इसे रक्त वाहिकाओं के जरिए हृदय तक पहुंचाया जाता है।

कार्डिएक कैथीटेराइजेशन कोरोनरी एंजियोप्लास्टी और कोरोनरी स्टेंटिंग जैसी कुछ हृदय संबंधी समस्याओं के इलाज के रूप में भी काम करता है। लैब में एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी भी की जाती है। डा श्रीवास्तव ने बताया कि एंजियोग्राफी एक डायग्नोस्टिक टेस्ट है जो किसी भी संभावित हृदय की स्थिति की जांच के लिए रक्त वाहिकाओं की जांच करता है। एंजियोप्लास्टी एक मिनिमल इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें रेडियल या फेमोरल धमनी के माध्यम से हृदय की स्थिति का इलाज करने के लिए संकीर्ण धमनियों को चौड़ा किया जाता है।

कैथ लैब की पुरानी मशीन पूरी तरह खराब हो चुकी है। नयी मशीन अभी नहीं मिल पायी है। इस कारण कुछ दिक्कतें हैं। मरीजों को जल्द ही हार्ट का सम्पूर्ण इलाज मिलेगा।

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