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किसान आंदोलन : तोमर ने प्रदर्शनकारी संगठनों के साथ जल्द करेंगे वार्ता

नई दिल्ली। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को 27 दिन हो गए हैं और इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रदर्शनकारी किसान संगठन जल्द अपनी आंतरिक चर्चा पूरी करेंगे और संकट के समाधान के लिए सरकार के साथ पुन: वार्ता शुरू करेंगे।

तोमर ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के दो और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने कानूनों के प्रति अपना समर्थन जताया है। कृषि मंत्री ने दोनों समूहों से मुलाकात के बाद कहा, विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि यह बताने आए थे कि कानून अच्छे हैं और किसानों के हित में हैं। वे सरकार से यह अनुरोध करने आए थे कि कानूनों में कोई संशोधन नहीं किया जाए।

उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि वे (प्रदर्शनकारी किसान संघ) जल्द अपनी आंतरिक वार्ता पूरी करेंगे और सरकार के साथ बातचीत के लिए आगे आएंगे। हम सफलतापूर्वक समाधान निकाल सकेंगे। कृषि मंत्रालय ने रविवार को प्रदर्शनकारी समूहों को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया था कि सरकार के प्रस्तावों पर अपनी चिंताएं स्पष्ट करें तथा प्रदर्शन को समाप्त करने के लिहाज से वार्ता के अगले चरण के लिए तारीख तय करें। दोनों पक्षों के बीच हुई कम से कम पांच दौर की औपचारिक वार्ता बेनतीजा रही है और आंदोलनकारी किसान तीनों कानूनों को निरस्त करने से कम किसी चीज पर राजी नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश की किसान संघर्ष समिति (केएसएस) और दिल्ली का इंडियन किसान यूनियन (आईकेयू) उन किसान संगठनों में शामिल है, जिन्होंने पिछले तीन सप्ताह में नए कृषि कानूनों के प्रति समर्थन जताया है। इससे पहले हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ संगठन सरकार का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, करीब 40 समूह दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और 27 दिन से वहां डेरा डाले हैं।

मंगलवार को हुई बैठक में राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर और उत्तराखंड के पूर्व मंत्री तथा आईकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकुमार वालिया भी उपस्थित थे। केएसएस के अध्यक्ष अजय पाल प्रधान ने बैठक के बाद कहा, केंद्र द्वारा लागू किए गए तीनों कानून अच्छे हैं और किसान समुदाय के हित में हैं। केएसएस ने कानूनों का समर्थन करते हुए कृषि मंत्री से यह अनुरोध भी किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

प्रधान ने दावा किया कि कानूनों के समर्थन में ट्रैक्टरों पर सवार होकर आए हजारों किसानों को सीमा पर रोक दिया गया है, इसलिए कुछ प्रतिनिधि ही मुलाकात के लिए आए। केएसएस ने तोमर को दिए ज्ञापन में सरकार से यह अनुरोध भी किया है कि गौतमबुद्ध नगर के किसानों और नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना विकास प्राधिकरणों के बीच 2011-12 में हुए समझौते को लागू किया जाए।

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