महामारी के कारण देश में औद्योगिक गतिविधियां होली के कुछ पहले से ही प्रभावित होने लगी थीं। होली के बाद राज्यों में लॉकडाउन, जनता कर्फ्यू के बाद पीएम मोदी ने सीधे तीन सप्ताह का राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित कर दिया। लॉकडाउन के कारण निर्माण श्रमिक, होटल, ढाबों के श्रमिक और करोड़ों औद्योगिक श्रमिक बेरोजगार हैं। ऐसे लोगों की एक तरफ जेब खाली है और दूसरी तरफ काम बंद है।
महाबंदी से करोड़ों लोगों की आजीविका संकट में है। दिहाड़ी श्रमिकों एवं बंदी से प्रभावित कामगारों को मदद देने के लिए ही केन्द्र सरकार ने 1.70 लाख करोड़ का बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है। केन्द्र सरकार के राहत पैकेज से करोड़ों गरीबों को फायदा होगा लेकिन यह फायदा उन्हीं लोगों तक सीमित रहेगा जो योजनाओं में रजिस्टर्ड हैं। करोड़ों श्रमिक ऐसे हैं जो सरकारी झंझट में पड़ने के बजाय सीधे अपनी मेहनत से कमाते खाते हैं।
ऐसे श्रमिक सरकार की तमाम योजनाओं के लिए पात्र हैं लेकिन सरकारी झंझट से बचने और जानकारी न होने के कारण इनको योजनाओं का लाभ नहीं मिलता। ऐसे भी करोड़ों लोग हैं जो अपात्र हैं लेकिन चातुरी एवं बाबुओं से संपर्क बनाकर तमाम योजनाओं में पंजीकृत हो जाते हैं और वेजा लाभ उठाते हैं। संकट के समय सरकार ने जो राहत पैकेज दिया है उससे देश के करोड़ों गरीबों एवं पात्रों को बड़ी मदद मिलेगी। करोड़ों अपात्र भी सरकारी राहत उड़ाने में सफल रहेंगे, लेकिन इसी बीच करोड़ों ऐसे गरीब, मजदूर भी हैं योजनाओं में रजिस्टर्ड नहीं हैं और इस कारण इनको कोई लाभ नहीं मिलेगा।
संकट के समय ऐसे श्रमिकों एवं गरीबों के सामने जीवन निर्वाह की सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार के द्वारा घोषित राहत पैकेज में एक-एक लाभार्थी को कई-कई योजनाओं का लाभ मिलेगी। एक साथ उज्ज्वला, मनरेगा, दिहाड़ी श्रमिक, खाद्य सुरक्षा, जनधन जैसे लाभ मिल सकते हैं। यह ठीक भी है। अगर गरीबों को अनेक योजनाओं से लाभ पहुंचाया जाता है तो इससे उन्हें सहारा मिलेगा, लेकिन ऐसे करोड़ों लोग जो योजनाओं में पंजीकृत नहीं हैं उनका क्या होगा?
दिहाड़ी श्रमिकों में जितने रजिस्टर्ड हैं उससे कहीं अधिक गैर-पंजीकृत श्रमिक हैं। जबकि लेबर सेस में सबका योगदान है। दिल्ली और यूपी की सरकार दिहाड़ी श्रमिकों को मदद दे रही है, लेकिन यह मदद उन्हीं श्रमिकों को मिलेगा जिनका श्रम विभाग में पंजीकरण होगा और यह पंजीकरण नवीनीकृत होगा। ऐसे में यक्ष प्रश्न यह है कि गैर पंजीकृत श्रमिकों, बिना राशन कार्ड वाले व्यक्तियों का क्या होगा?
इस समय सरकार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए और राहत पैकेज से वंचित लोगों को भी आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान लेकर कुछ मदद करनी चाहिए। एक उपाय यह भी है कि सरकार सबका पंजीकरण करे, आस्थायी राशन कार्ड बनाये या फिर यूनिवर्सल कर कम से कम एक लाभ उनको भी मिले जिनको कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार नया पंजीकरण करके, नया राशन कार्ड बनाकर या फिर योजनाओं को आर्थिक सीमा के दायरे में यूनिवर्सल बनाकर सबको लाभ दे सकती है। इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि संकट के समय किसी को भूखे पेट न रहना पड़े।





