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पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद : चीन को भारतीय कमांडरों का सख्त संदेश

  • दूसरे दौर की वार्ता में दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े, सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण
  • एलएसी पर भारत की विशेष पर्वतीय सेना भी तैनात

नई दिल्ली। लद्दाख में भारत और चीन के सैन्य कमांडरों की दूसरे दौर की सोमवार को बैठक हुई। बातचीत का मुख्य विषय दोनों देशों के बीच में टकराव को कम करके शांति बहाली के प्रयास करना और सहमति बनाना है। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य कमांडरों अपने-अपने रुख पर अड़े रहे और दावे किए, लेकिन भारतीय सैन्य कमांडरों ने चीनी पक्ष को तल्ख संदेश जरूर दे दिया है।

इस दौरान चीन के सैन्य कमांडर ने यह जरूर स्वीकार कर लिया कि 15 जून को हुई हिंसक झड़प में केवल भारत के ही कमांडिंग आफिसर समेत तमाम सैनिक शहीद और घायल नहीं हुए हैं, बल्कि चीन को भी खासा नुकसान हुआ है। उसने माना कि चीन का भी कमांडिंग आफिसर हिंसा के दौरान मारा गया। बताया जा रहा है कि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। चीनी पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को बदलने पर अड़ा है। जबकि, भारत इसके लिए राजी नहीं है।

राजनयिक स्तर पर भी अपनी मुहिम तेज

भारत ने इसके इतर राजनयिक स्तर पर भी अपनी मुहिम तेज कर दी है। इसके साथ ही, भारत ने एलएसी पर अपनी विशेष पर्वतीय सेना को भी तैनात कर दिया है। बताया जाता है कि इसका चीन के पास कोई तोड़ नहीं है। बता दें कि दोनों देशों ने सीमा पर फौज का जमावड़ा किया है। हिंसक झड़प के बाद तो भारत के अग्रिम फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई, मिराज, मिग-29, जगुआर और चिनूक हेलीकाप्टर (जंगी) चीन से लगती हुई सीमा पर तैनात हैं। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों ने यह कदम रक्षात्मक ही उठाया है।

वायुसेना किसी भी चुनौती से निपटने को तैयार

वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब वाले दर्जन भर वायुसैनिक अड्डे पर वायुसेना किसी भी चुनौती से निबटने का इंतजार कर रही है। इसी के सामानांतर अमेरिका से आई मीडियम रेंज होवित्जर, बोफोर्स तोप भी किसी भी स्थिति से निबटने में सक्षम है। उत्तराखंड, लद्दाख, हिमाचल से लगती सीमा, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलों ने निगरानी बढ़ा दी है। अरुणाचल प्रदेश में तवांग और चीन से सटे क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षा के लिए भारतीय सेना के करीब 50 हजार सैन्यबल तैनात है।

विशेष पर्वत पर भी सेना तैनात

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत ने अपनी विशेष पर्वतीय सेना को भी तैनात कर दिया है। भारत की यह तैयारी चीन की तैयारी को देखते हुए है। चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपना सैन्य जमावड़ा काफी बढ़ा रखा है। चीन की फौज ने पैंगोंग त्सो झील के पास स्थायी बंकर, सैन्य संरचना आदि खड़ी कर ली है। फिंगर चार से आठ तक वह भारतीय सुरक्षा बलों को गश्त करने के लिए जाने नहीं दे रहे हैं और गलवां घाटी इलाके में भारतीय भू-भाग को पूरी तरह से खाली नहीं किया।

चीन ने हाल में तिब्बत के इलाके में सैन्य किया अभ्यास

इस क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण के चीन के भू-भाग तक सैनिकों, भारी सैन्य वाहन आदि का काफी जमावड़ा है। भारतीय वायुक्षेत्र में भारत के तो चीन के क्षेत्र में उसके जंगी जहाज, हेलीकाप्टर उड़ान भर रहे हैं। चीन ने हाल में तिब्बत के इलाके में सैन्य अभ्यास किया है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि वहां से भी उसे सैन्य बलों की तैनाती लद्दाख की तरफ कर दी है। इसके अलावा, उत्तराखंड से सटे चीनी क्षेत्र, सिक्किम में नाथू लॉ के उस पार से लेकर डोकलाम तक चीनी सेना की भारीभरकम मौजूदगी है।

स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में है

भारतीय सेना और कूटनीति, राजनयिक गलियारे के सूत्र तथा कुछ पूर्व सैन्य अधिकारी और विदेश सेवा के अधिकारियों को स्थिति काफी तनावपूर्ण दिखाई पड़ रही है। हालांकि, सैन्य सूत्रों के हवाले से आ रही सूचना के मुताबिक स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में है। बताते हैं कि भारत, चीन समेत अपने किसी भी पड़ोसी देश के साथ तनाव, टकरावपूर्ण रिश्ते का पक्षधर नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने समकक्ष चीन के विदेश मंत्री वांग यी को साफ तौर पर इसे बता दिया है। वांग यी ने भी एस जयशंकर से कहा है कि उनका देश किसी तरह का टकराव आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।

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