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भाजपा और अन्य दलों में ज़मीन-आसमान का अंतर : योगी

  • यूपी ने वोह दौर भी देखा जब अपराधी-माफिया तय करते थे दलों की नीतियां

  • उस वक़्त सत्ता माफियाओं को सर माथे पर रखती थी

  • गरीबों की ज़मीन पर काबिज़ कर महल खड़े कर लिए गये

  • कुछ लोगों को विकास और गरीबों की खुशहाली रास नहीं आ रही

लखनऊ। विपक्ष पर दंगे करवाने की साहिश रचने और इनके पीछे फॉरेन फंडिंग का आरोप लगाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब विपक्षी दलों की सरकारों में राजनीति और आपराधिक गठजोड़ के मुद्दे पर हमला बोला है। योगी ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा और अन्य दलों की सरकार में जमीन-आसमान का फर्क है। उत्तर प्रदेश ने वह दौर भी देखा है जब अपराधी-माफिया राजनीतिक दलों की नीतियां तय करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय सत्ता अपराधियों-माफियाओं को सिर-आंखों पर रखती थी, जिसकी बदौलत यह लोग खूब फले-फूले। गरीबों की जमीनों पर काबिज कर महल खड़ा कर लिए। पर अब यह सब नहीं चलेगा। यह नया यूपी है, जो अपराधियों का मानमर्दन करता है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मल्हनी (जौनपुर) विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के मद्देनजर वहां के बूथ, मंडल और सेक्टर के प्रमुख पदाधिकारियों की वर्चुअल बैठक को संबोधित किया।

योगी ने कहा कि विकास का कोई विकल्प नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास का जो नारा दिया था उसके अनुसार केंद्र में और प्रदेश में काम हो रहे हैं। कोरोना के अभूतपूर्व संकट के दौरान भी 87 लाख पात्रों बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों को एडवांस पेंशन, चार करोड़ घरों को बिजली, गरीबों के बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालय, विश्वस्तरीय बुनियादी संरचना के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसव, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्स्प्रेस-वे का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए जेवर, कुशीनगर, अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के साथ अन्य जगहों पर एयरपोर्ट का निर्माण इसका सबूत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग जिनकी सोच में ही विकास नहीं है। जिनकी सोच जाति, मजहब, धर्म और क्षेत्र तक सीमित है। जो पार्टी को परिवार की तरह चलाते हैं। अराजकता और भ्रष्टाचार जिनकी पहचान है। जिनके जमाने में विकास के 90 फीसद पैसे का बंदरबाट हो जाता था, उनको बिना भेदभाव के पूरी पारदर्शी के साथ हो रहे विकास के काम और गरीबों की खुशहाली रास नहीं आ रही है। लिहाजा वह समाज को बांटने का जाति और संप्रदाय का वही पुराना हथकंडा अपना रहे हैं। पर ऐसे लोगों की दाल अब गलने वाली नहीं। जनता सब जान चुकी है। लगातार उनको बता भी रही है। उपचुनाव में भी बताएगी।

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