लखनऊ। आम की यह खास वैरायटी राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में पैदा होती है। इसी क्रम में एक बार फिर लखनऊ में दुनिया का सबसे खूबसूरत हुस्नआरा आम इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हुस्नआरा आम में मिठास के साथ साथ खूबसूरती भी है। लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र से आम पूरे देश और विदेश में सप्लाई होता है। बीते 13 वर्षों से आम की अलग-अलग वैरायटी की बागवानी करने वाले मलिहाबाद क्षेत्र के हमिरापुर के ग्राम प्रधान जुनैद अहमद ने बताया कि इस आम की खूबसूरती का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि यह यह मांग के बाद मार्केट में गायब हो जाता और इसे लोग घरों में सजाकर रखते हैं।
हुस्नआरा आम की कहानी:
आम के किसान जुनैद बताते हैं कि मिजार्गंज निवासी मिर्जा हसनू की पुत्री हुस्नआरा के नाम पर इस आम का नाम रखा गया खुशीर्दाबाद के नवाब ने इसका नाम रखा था। यह आम दूसरे आमों से स्वाद और रंग रूप में बिल्कुल अलग है। आम की यह किस्म अपनी खूबसूरती के चलते किसानों को अच्छा मुनाफा भी दिलाती है। बाजार में इस आम की कीमत , 200 से लेकर 300 रुपए किलो तक होती है।
हुस्नआरा आम की खासियत :
हुस्नआरा आम का रंग सुर्ख होता है। जब यह कच्चा होता है तो हरे रंग का दिखाई देता है लेकिन पकने के बाद यह आम सुनहरा ,पीला और सुर्ख लाल हो जाता है। इस आम का छिलका काफी पतला और कश्मीरी सेब की तरह होता है। यह आम नाम के अनुरूप अपनी खूबसूरती के लिए भी पूरे विश्व में मशहूर है।
हुस्नआरा आम की कीमत 200 रुपए किलो:
ग्राम प्रधान जुनैद बताते हैं कि मिजार्गंज निवासी मिर्जा हसनू की पुत्री हुस्नआरा के नाम पर इस आम का नाम रखा गया खुशीर्दाबाद के नवाब ने इसका नाम रखा था। यह आम दूसरे आमों से स्वाद और रंग रूप में बिल्कुल अलग है. आम की यह किस्म अपनी खूबसूरती के चलते किसानों को अच्छा मुनाफा भी दिलाती है। बाजार में इस आम की कीमत 200 रुपए किलो तक होती है।
खाड़ी देशों में होता है आम का निर्यात:
बता दें कि देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत अकेले उत्तर प्रदेश में होता है। लखनऊ से यूरोप, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व खाड़ी के देशों में आम का निर्यात होता है। विश्व प्रसिद्ध मलिहाबादी दशहरी आम का दुबई, मस्कट, बहरीन और यूएई में भी जाता है। साल भर के इंतजार के बाद आखिरकार अब समय आम का कारोबार शुरू होने होने वाला है। मलिहाबाद में लगने वाली अस्थायी मंडी एक बार फिर से सजने की तैयारी है। गर्मी के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों से खरीदार पहुंच रहे हैं।
एक पेड़ से किसान को 20 हजार तक की आमदनी:
प्रधान जुनैद अहमद के पास अपने बाग हैं, उनकी मानें तो, मलिहाबाद में हमारे बाग में तरह-तरह के आम आते हैं, जिसमें काफी ज्यादा जिनकी मांग रहती है,उसमें हुस्नआरा आम एक है। इसके साथ-साथ ही लंगड़ा, सफेदा, दशहरी आम भी हमारे बाग में लगते हैं, जिसकी हम देश-विदेश में सप्लाई करते हैं। उन्होंने बताया कि आम का उत्पादन भी काफी अच्छा है जिसके चलते एक पेड़ से किसान को 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस आम की सबसे बड़ी खासियत है कि पेड़ लगाने के 3 साल के भीतर ही यह फल देने लगता है। इस पेड़ से कोई बच्चा भी बड़े आसानी से फल को तोड़ सकता है। जमीन से 6 इंच ऊपर इस किस्म के पेड़ में फल लगने लगते हैं।
पतला छिलका और कश्मीरी सेब जैसा लुक:
हुस्नआरा आम का रंग सुर्ख होता है। जब यह कच्चा होता है तो हरे रंग का दिखाई देता है, लेकिन पकने के बाद यह आम सुनहरा, पीला और सुर्ख लाल हो जाता है। इस आम का छिलका काफी पतला और कश्मीरी सेब की तरह होता है। यह आम नाम के अनुरूप अपनी खूबसूरती के लिए भी पूरे विश्व में मशहूर है।





