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अनुमान से बड़ा है संकट

भारत और पूरी दुनिया बीती एक सदी में सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। 1918-20 में स्पेनिश फ्लू और इससे ठीक पहले 1914-18 में प्रथम विश्व युद्ध से दुनिया भयानक उथल-पुथल के दौर से गुजरी थी। भारत पर इसका इतना भयानक असर हुआ कि 1921 की जनगणना में दशकीय जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक हो गयी।

अर्थात 1911-21 तक, दस वर्षों के दौरान जनसंख्या बढ़ने के बजाय घट गयी। स्पेनिश फ्लू से भारत इतना प्रभावित हुआ तो कोरोना महामारी जो संक्रमण की दृष्टि से सबसे अधिक खतरनाक महामारी है, इससे कैसे बच सकता है? कोरोना का भी नकारात्मक असर कहीं न कहीं देखने को तो मिलेगा ही। आज स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं।

बीमारी को शीघ्र ही पकड़कर उपचार शुरू हो जाता है और इस कारण कोरोना मौत के लिहाज से बहुत विकराल नहीं हो सका, लेकिन कोरोना से बचने, इलाज की सुविधाओं को बेहतर करने और प्रसार को रोकने के लिए जो लॉकडाउन लागू किया गया उसका असर अर्थव्यवस्था पर तो पड़ेगा ही। 2020-21 की पहली तिमाही अर्थात अप्रैल-जून की तिमाही में अप्रैल और मई के दौरान कम्पलीट लॉकडाउन रहा और 1 जून से जब अनलॉक 0.1 एक की शुरुआत हुई।

अब लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है लेकिन आज भी सिनेमा, स्कूल कालेज, होटल, टूर एण्ड ट्रैवल आदि पूरी तरह बंद हैं। तमाम क्षेत्र बहुत सीमित रूप से खुले हैं। अधिकांश ट्रेनें बंद है जबकि रेलवे अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। जब कारोबार बंद रहेंगे, सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों पर नियंत्रण रहेगा तो फिर जीडीपी कहां से आयेगी। इसलिए लॉकडाउन तिमाही में जो 23.9 फीसद की गिरावट देखने को मिली है दरअसल वह नुकसान का सही आंकड़ा नहीं है।

इससे बस इतना अनुमान लगाया जा सकता है अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। लॉकडाउन के दौरान निर्माण क्षेत्र में 50 फीसद से अधिक गिरावट आयी, विनिर्माण में करीब 40 फीसद, अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े क्षेत्र सर्विस सेक्टर में 20 फीसद, इण्डस्ट्री में 38 फीसद, टूर, ट्रैवल एवं होटल इण्डस्ट्री में 47 फीसद गिरावट दर्ज की गयी। संगठित क्षेत्र में इतनी बड़ी गिरावट है जिसके आधार पर जीडीपी में 23.9 फीसद संकुचन का आंकड़ा निकलता है।

असंगठित क्षेत्र जहां कुल रोजगार का करीब 80 फीसद सृजित होता है, महामारी का सबसे खराब असर उसी पर पड़ा है। यही कारण है कि देश को वास्तविक नुकसान जीडीपी के आंकड़ों से कहीं अधिक हुआ है। असंगठित क्षेत्र तबाह होने के कारण बेरोजगारी का आंकड़ा बहुत भयावह है। इसलिए अब अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले पूरे देश में आवागमन शुरू करना चाहिए। रेलवे शुरू करनी चाहिए और लॉकडाउन को प्रतिबिंधित करना चाहिए। कोरोना लॉकडाउन से रुका नहीं है और न ही यह इतना भयानक है। इसलिए सरकार को अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए ईमानदारी प्रयास करने चाहिए।

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