जिनवाणी गौरव दिवस विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग उ.प्र.) एवं इन्दिरा नगर दिगम्बर जैन सेवा संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में श्रुत पंचमी के पावन पर्व पर जिनवाणी गौरव दिवस विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन जैन मन्दिर इन्दिरानगर में हुआ। प्रारम्भ में इन्दिरानगर दिगम्बर जैन संस्थान के मंत्री अभिषेक जैन एवं सांस्कृतिक मंत्री ऋषभ जैन श्रुत जिवाणी पूजन महाराज श्री के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न कराया। सहयोग अरविन्द जैन एवं अनुरोध जैन ने किया। विषय प्रवर्तन करते हुये प्रो. अभय कुमार जैन ने बताया कि लगभग 2000 वर्ष पूर्व आचार्य धरसेन की प्रेरणा से उनके शिष्यों पुष्पदन्त एवं भूतबलि ने षट्खण्डागम शास्त्र को ताणपत्रों पर लिपिबद्ध किया। जेष्ठ शुक्ल पंचमी जैन धर्म के प्रथम शास्त्र षट्खण्डागम की रचना पूर्ण हुयी। प्रो. अभय कुमार जैन ने कहा, आज आवश्यकता इस बात की है कि हम धर्म प्रेमी युवापीढ़ी को प्राचीन भारतीय संस्कृति के साथ जोडे़, तभी इस प्रकार के समारोह की सार्थकता होगी। डॉ.संजीव जैन ने कहा, धर्म के लिए श्रुत ज्ञान बहुत आवश्यक है। युवाओं के लिए श्रुत ज्ञान जिनवाणी शास्त्रों में उपलब्ध है। वही, मुनिराज विशल्य सागर ने कहा प्राकृत भाषा में वर्णित त्रिलोकसार में सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त सभी संरचनाओं की व्याख्या है। श्रुत ज्ञान के बिना केवलज्ञान और मोक्ष प्राप्त नहीं होता है। कार्यक्रम के अन्त में प्रो. अभय कुमार जैन ने उ.प्र.जैन विद्या शोध संस्थान की ओर से ऋषभ जैन, महावीर जैन (बाराबंकी), रोहित जैन, ई. विशाल जैन का सम्मान किया। कार्यक्रम में जैन समाज आशियाना, चौक, काकोरी, गोमती नगर, के महिला पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।





