भारतेंदु नाट्य अकादमी में नाटक मीरा का मंचन
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के तत्वावधान में ग्रीष्मकालीन युवा रंग कार्यशाला की प्रस्तुति नाटक मीरा का मंचन बीएनए में किया गया। नाटक का निर्देशन व मंच परिकल्पना ज्योति नारायण नाथ ने किया। यह नाटक केवल संत-कवयित्री मीरा बाई की जीवनी नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग समयों के बीच चलने वाला एक जीवंत संवाद है। एक ओर सोलहवीं शताब्दी की मीरा है, जो राजमहलों, सामाजिक बंधनों, जाति-व्यवस्था और सत्ता के दबावों के बीच अपनी आत्मा की स्वतंत्रता खोज रही है , दूसरी ओर आज की पीढ़ी है, जो आधुनिकता, पहचान, स्वतंत्रता, स्त्री-अधिकार, सफलता और आत्म-संघर्ष जैसे प्रश्नों से जूहूर रही है। कहानी की शुरूआत एक कॉलेज थिएटर समूह से होती है, जो मीरा पर आधारित नृत्य नाटिका तैयार कर रहा है। रिहर्सल के दौरान कलाकारों के बीच मीरा के जीवन, भक्ति, स्त्री-स्वतंत्रता, सामाजिक संरचनाओं और आधुनिक जीवन के द्वंद्वों पर चचार्एँ होती हैं। नाटक यह प्रश्न उठाता है कि स्वतंत्रता वास्तव में क्या है? क्या वह केवल सामाजिक बंधनों को तोड़ना है, या अपने भीतर की आवाज को सुनने का साहस भी? मीरा का जीवन इस प्रश्न का उत्तर किसी उपदेश के रूप में नहीं देता, बल्कि एक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करता है। मीरा इतिहास नहीं है; वह एक दर्पण है जिसमें हर युग स्वयं को देख सकता है। नाटक में मुख्य भूमिका रश्मि, सोनी, यज्ञ, सोनिया, सिद्धार्थ, रितेश, प्रबद्ध, लक्ष्मी, भैरवी, ओहिल, आस्था, आमीर, आदित्य आदि ने निभायी।





