सहभागिता, मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम है
लखनऊ। संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली एक सशक्त अभिव्यक्ति है। इसी सोच को साकार करते हुए संगीत प्रेमियों के मंच राग रंग ने अपने तीसरे संगीतमय कार्यक्रम का भव्य आयोजन गोमती नगर स्थित उर्दू अकादमी में किया, जिसमें शहर के अनेक संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक मधुर गीतों और सुरमयी प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बाँधा कि पूरा वातावरण संगीत के रंगों से सराबोर हो उठा। मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक कलाकार ने अपनी गायकी से यह सिद्ध किया कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति और आत्मसंतुष्टि का माध्यम है। इस अवसर पर राग रंग की यात्रा को याद करते हुए बताया गया कि संस्था की औपचारिक शुरूआत लगभग एक वर्ष पूर्व हुई थी, जबकि इसकी परिकल्पना को साकार करने में तीन से चार वर्षों का सतत प्रयास, अध्ययन और समर्पण लगा। संस्था के एडमिन अनूप सिन्हा, सचिव मनोज कपूर, डायरेक्टर देवेंद्र मेंघी एवं राग रंग परिवार के अन्य सदस्यों के अथक प्रयासों से शुरू हुई यह पहल आज संगीत प्रेमियों के एक बड़े परिवार का रूप ले चुकी है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि राग रंग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आत्मीयता है। यहाँ संगीत प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं, बल्कि सहभागिता, मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम है। इस मंच से जुड़े सदस्य अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर संगीत साधना और आपसी मेल-मिलाप के लिए एकत्रित होते हैं तथा सुरों के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करते हैं। इस संगीतमय संध्या में डॉ. राजेश श्रीवास्तव, सीमा विरमानी, मनोज कपूर, गौरव श्रीवास्तव, अनुश्रुता सिन्हा, हिमांशु वर्मा, पूनम दीनानाथ, शिखा अबरोल, संजय अबरोल, सिद्धार्थ शुक्ला, अनूप सिन्हा तथा आनंद कृष्ण ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कलाकारों ने सदाबहार एवं लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। आयोजकों ने कहा कि राग रंग का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों को एक मंच प्रदान करना है जो संगीत से प्रेम करते हैं और उसे अपनी खुशियों तथा भावनाओं की अभिव्यक्ति मानते हैं। यही कारण है कि संस्था का कारवाँ निरंतर आगे बढ़ रहा है और हर कार्यक्रम के साथ नए सुरीले साथी इससे जुड़ते जा रहे हैं। कार्यक्रम में उपस्थित संगीत प्रेमियों ने राग रंग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे शहर के सांस्कृतिक जीवन के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायी प्रयास बताया। आयोजन का समापन सामूहिक गायन, आत्मीय संवाद और भविष्य में ऐसे और संगीतमय आयोजनों के संकल्प के साथ हुआ। राग रंग की इस तीसरी संगीतमय संध्या ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब सुर, ताल और दिल एक साथ मिलते हैं, तो संगीत केवल सुना नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है।





