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किसानों को जमीन से बेदखल किए जाने पर कांग्रेस ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित जलालपुर गांव में प्रशासन द्वारा किसानों को उनकी जमीन से कथित तौर पर बेदखल किए जाने को विपक्षी कांग्रेस ने अमानवीय और असंवैधानिक करार देते हुए इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

कांग्रेस के मीडिया संयोजक ललन कुमार की तरफ से मंगलवार को मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि बख्शी का तालाब क्षेत्र के जलालपुर गांव में कई गरीब, दलित किसान परिवार अपनी जमीन पर खेती कर जीविका चलाते हैं। मगर कुछ सप्ताह पहले प्रशासन ने वहां खेतों पर जेसीबी वाहन चलवा कर खेतों की हदबंदी तोड़ दी और किसानों को खेती करने से रोक दिया।

उन्होंने पत्र में कहा कि जब किसानों ने इसका विरोध किया तो प्रशासन ने बताया कि यह जमीन तालाब की है और यहां खेती करना अवैध है, जबकि किसानों के पास उस जमीन के दस्तावेज भी मौजूद हैं। वे किसान वहां पिछले कई पीढय़िों से खेती कर रहे हैं। कुमार ने कहा कि इसी से सटे हुए क्षेत्र में दबंगों को जमीन के पट्टे भी दिए गए हैं और कार्वाई के नाम पर गरीब किसानों को परेशान किया जा रहा है।

प्रशासन द्वारा किसानों को बिना कोई नोटिस दिए अचानक खेत पर पहुंचकर उन्हें बेदखल किया जाना अमानवीय और असंवैधानिक है और कांग्रेस इसकी घोर निंदा करती है। कांग्रेस नेता ने पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह इस मामले को गंभीरता से लें ताकि गरीब किसानों की रोजी रोटी पर कोई संकट ना आए।

उन्होंने पत्र के साथ कई किसानों द्वारा हस्ताक्षरित एक खत भी संलग्न किया है जिसमें बताया गया है कि गत एक जुलाई को तहसील प्रशासन के एक दल ने बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंचकर उनके खेतों की घेराबंदी शुरू कर दी। इसके लिए उन्हें पहले से कोई सूचना या नोटिस नहीं दी गई थी।

पत्र में किसानों ने आरोप लगाया कि जब वे इस कार्रवाई का कारण पूछने के लिए गए तो उन्हें धमका कर भगा दिया गया और खेतों पर लगी बोरिंग और इंजन इत्यादि को जबरन हटा कर खेतों की मेड़ तोड़ डाली गई।

पत्र में किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करने पर किसानों को फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी भी दी गई है। किसानों ने सरकार से इस मामले की जांच करा कर न्याय दिलाने की मांग की है। इस बीच, बख्शी का तालाब तहसील के उपजिलाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक तालाब की जमीन पर खेती नहीं की जा सकती। कुमार ने कहा किसानों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं किया जाएगा। वे अपनी खतौनी तथा अन्य दस्तावेज पेश करें। अगर वह सही होंगे तो उन्हें खेती की इजाजत दी जाएगी।

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