लोहिया संस्थान में डॉक्टरों ने आठ घंटे तक किया आपरेशन
वरिष्ठ संवाददाता
लखनऊ। दुलर्भ बीमारी से डिस्टोनिया से ग्रसित एक युवती की लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने जटिल ब्रेन सर्जरी की। करीब आठ घंटे तक चल आपरेशन के बाद अब मरीज की हालत में सुधार है। डॉक्टरों का कहना है कि मांपेशियों में ऐंठन पैदा करने वाला यह रोग 16 लाख लोगों में किसी एक होता है।
सीतापुर की रहने वाली 21 वर्षीय लड़की जब इलाज के लिए डा. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान आयी तो उसके हाथ-पैर टेढ़े-मेढ़े थे। वह ठीक खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। बोलने में भी दिक्कत थी। न्यूरोलॉजी के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. दिनकर कुलश्रेष्ठ ने मरीज की जांच के बाद तय किया कि सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने आपरेशन कराने की सलाह दी। परिवारीजनों ने युवती को न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार सिंह को दिखाया। डॉ. दीपक ने बताया कि युवती बचपन से ही डिस्टोनिया से पीड़ित थी और उसके लक्षणों में सुधार नहीं हो रहा था।
दवाओं से बीमारी नियंत्रण में नहीं आ रही थी। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के इलाज में टॉक्सिन इंजेक्शन दिया जाता है लेकिन वह भी कारगर नहीं हो रहा था। चंकि यह सर्जरी काफी जटिल थी, इसलिए उन्होंने सर्जरी के लिए डॉ. संजीव श्रीवास्तव, वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, आर्टेमिस अस्पताल, गुड़गांव से की मदद ली। सर्जरी के दौरान खोपड़ी में छेद किए गए और स्टीरियोटैक्टिक हेड फ्रेम को लगाया गया। सिर के सीटी स्कैन और एमआरआई और फ्रेम का उपयोग करके, छेद बनाने के लिए साइट का सटीक 3-डी स्थानीयकरण चुना गया। छेद मस्तिष्क क्षेत्र में डाले गए तारों के माध्यम से बनाए गए थे और रेडियोफ्रीक्वेंसी पल्स जनरेटर से जुड़े थे। इन उच्च आवृत्ति तरंगों के कारण ग्लोबस पैलिडस (पैलिडोटॉमी) में छेद किए गए। सर्जरी लगभग 7-8 घंटे चली। डा. दीपक ने बताया कि अब युवती की हालत पहले से काफी बेहतर है। उसक बोलने, चलने और बाहों को मोड़ने में सुधार हुआ है और उम्मीद है कि आने वाले महीनों में उनमें और सुधार होगा।
क्या है डिस्टोनिया
डा. दीपक ने बताया कि डिस्टोनिया एक प्रकार का मूवमेंट डिसआर्डर है। जो मांसपेशियों में ऐंठन से शरीर के अंगों में असामान्य मोड़ या मुद्रा का कारण बनता है। जब यह शरीर के कई क्षेत्रों को प्रभावित करता है, तो इसे डिस्टोनिया कहा जाता है। डिस्टोनिया आनुवांशिक बीमारी है। यह दिमाग में संक्रमण, सिर की चोट, मस्तिष्क रोगों के कारण से हो सकता है।





