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चीन : दगाबाजी और विश्वास घात के हजार चेहरे

अगर न्यूयार्क टाइम्स की यह रिपोर्ट सही है कि पिछले साल अक्टूबर महीने में अचानक मुंबई की गुल हुई बिजली के पीछे चीन का हाथ था, तो यह जितनी मानी जा रही है, उससे कई गुना ज्यादा खतरे की चेतावनी है। दुनिया का शायद ही कोई विचारक, शायद ही कोई ऐसा डिप्लोमेट पिछली पौन सदी में रहा हो, जिसने चीन के बारे में लोगों को सावधान रहने की चेतावनी न दी हो। लेकिन अंधेरे में डूबी मुंबई की घटना न सिर्फ सिहरा देने के लिए काफी है बल्कि यह मानने और सोचने के लिए भी है कि चीन दरअसल जितना काईयां, घुन्ना और दगाबाज माना जाता है, उससे भी कई गुना ज्यादा है।

आगे बढ़ें इससे पहले आइये पूरे मामले को समझ लें। 15-16 जून की आधी रात में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच जबरदस्त झड़प हुई थी। भारतीय सेना को चीनी सैनिकों के विश्वासघात से भारतीय जमीन को कब्जाने की कोशिश को उखाड़ फेंकने में बड़ी क्षति उठानी पड़ी थी। 20 सैनिक गलवान घाटी में शहीद हो गये थे।

हालांकि इस संघर्ष में चीन के मरने वाले सैनिक भारत से ज्यादा थे, लेकिन हमेशा की तरह चीन ने इस मामले में चालाकी दिखाते हुए दुनिया को अपने सैनिकों के हताहत होने के बारे में कुछ नहीं बताया। लगातार यही कहता रहा, उसे कोई नुकसान नहीं हुआ। ये तो चीन के दोस्त रू स की समाचार एजेंसी तास के फं दे में आ जाने की बात थी कि गुजरी 19 फरवरी 2021 को आखिरकार चीन को मानना पड़ा कि गलवान घाटी संघर्ष में उसके 4 सैनिक भी मारे गये थे।

हालांकि यहां भी उसने झूठ बोला था, क्योंकि उसने जो वीडियो जारी किया, उसके हिसाब से मरने वाले चीनी सैनिकों की संख्या 5 थी। हालांकि वास्तव में यह 40 से ज्यादा 43 और 45 के बीच थी। बहरहाल अब हम पीछे चलते हैं और उस घटना को याद करते हैं जिसमें समूचा मुंबई कई घंटों के लिए घोर अंधेरे में डूब गया था। चलती हुई लोकल ट्रेन रेलवे ट्रैक पर खड़ी हो गई थी, शेयर बाजार ठप्प पड़ गया था। अस्पतालों की बिजली गुल हो जाने से कोरोना की जंग में हाहाकार मच गया था।

न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक वास्तव में यह सब किसी आकस्मित दुर्घटना का नतीजा नहीं था, न ही किसी तकनीकी फेल्योर का नतीजा था। यह सीधे सीधे चीन के साइबर अटैक का नतीजा था। इस अटैक का इरादा वैसे समूचा हिंदुस्तान था, लेकिन किसी वजह से यह मुंबई तक ही सीमित रहा। महाराष्ट्र की सरकार ने इस खबर के बाद घोषणा कर दी है कि तीन सदस्यों की एक कमेटी इस पूरे मामले की छानबीन करेगी और उसके जरिये नतीजे पर पहुंचेगी।

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