लखनऊ/अयोध्या। सपा प्रमुख आखिलेश यादव द्वारा अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सपा प्रमुख ने दावा किया है कि मंदिर के दान पात्र में आई करोड़ों रुपये की रकम गायब पाई गई है और इस मामले में अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह मामला दुनियाभर के भगवान राम के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और ऐसी खबर बेहद संवेदनशील है। उन्होंने इसे ट्रस्ट के लिए शर्मनाक बताते हुए कहा कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सामने आकर स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है। उन्होंने न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग करते हुए सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन दावों को खारिज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही किसी से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मीडिया में चल रही कुछ खबरें भ्रामक हैं और फिलहाल सामान्य ऑडिट प्रक्रिया जारी है।
इस बीच, सूत्रों के हवाले से यह भी खबर सामने आई कि दान राशि की गिनती के दौरान कथित गड़बड़ी को लेकर जांच की गई और कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेने की बात कही गई। हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट द्वारा गिनती की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को दी गई है और दान पात्रों में आई राशि का नियमित हिसाब-किताब रखा जाता है।
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने वीडियो संदेश जारी कर इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं. ऑडिट कार्य कई दिन तक चलता है। वही कार्य आजकल हो रहा है। अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आयी है।
वहीं, निर्मोही अखाड़ा के महंत व राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने भी ट्रस्ट का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें किसी घोटाले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं और अब तक किसी प्रकार की आपत्ति सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और कोई भी गलत कार्य करने वाला स्वयं दंडित होगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। वहीं, भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने इसे ट्रस्ट का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि सरकार का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है और हर आरोप का जवाब देना जरूरी नहीं।
सुभासपा ने भी किया समाजवादी पर पलटवार
सुभासपा प्रवक्ता पीयूष मिश्र ने भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए पलटवार किया और एक्स पर लिखा- अखिलेश यादव जी, राम मंदिर के चढ़ावे की रकम गायब होने पर आपको अचानक इतनी ‘चिंता’ हो रही है, जबकि आज तक आप राम मंदिर के द्वार तक नहीं पहुँचे। जिनके पिता मुलायम सिंह यादव ने 1990 में निहत्थे राम भक्त कारसेवकों पर अयोध्या में गोलियाँ चलवाईं, जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जानें दीं, उसी परिवार का बेटा आज मंदिर ट्रस्ट पर उंगली उठा रहा है।
जिनके दिल में राम नहीं बसते, वे मंदिर की चिंता नहीं करते सिर्फ वोट और राजनीति की चिंता करते हैं। राम भक्तों को अब आपके इस ढोंगपूर्ण ‘आस्था’ पर हँसी आ रही है. पहले अपने घर का 1990 का खून धोइए, राम मंदिर जाकर दर्शन कीजिए, फिर ट्रस्ट की सफाई दीजिए। वरना चुप रहना ही शोभा देगा।
गौरतलब है कि राम मंदिर परिसर में कई स्थानों पर दान पात्र लगाए गए हैं, जिनमें श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार धनराशि अर्पित करते हैं। इस राशि को प्रतिदिन एकत्र कर अधिकृत प्रक्रिया के तहत गिना जाता है। मौजूदा विवाद के बीच जहां एक ओर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट पारदर्शिता बनाए रखने का दावा कर रहा है।





