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बसपा ने राज्यपाल से की सीएए हिंसा में गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की मांग

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी सांसद सतीश मिश्रा की अगुवाई में पार्टी के एक प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई और मारे गए लोगों को उचित मुआवजा देने की मांग की।

उन्होंने इस संबंध में राज्यपाल को एक ज्ञपन भी सौंपा। मिश्रा ने पत्रकारों से कहा, आज हमने राज्यपाल से मुलाकात की है। हिंसा के दौरान पुलिस ने तमाम निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया है। हमने उन लोगों रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा, हम पहले ही नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बोल चुके हैं। हमने तमाम मुद्दों पर लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक और विधानसभा से लेकर विधान परिषद तक विरोध प्रदर्शन किया है।

सीएए का भी विरोध में हमने लोकसभा और राज्यसभा में किया। मिश्रा ने कहा कि सीएए के नाम पर निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा, निर्दोष लोगों की रिहाई को लेकर राज्यपाल से मुलाकात हुई है। जिन लोगों ने हिंसा की है, उन्हें सजा जरूर मिले लेकिन कोई भी निर्दोष परेशान न हो तथा जो लोग हिंसा में मारे गए है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। बसपा प्रमुख मायावती द्वारा जारी इस ज्ञपन में कहा गया है, संशोधित नागरिकता कानून का पूरे देश में हर जगह काफी तीव्र विरोध हुआ और इस मामले में हमारी पार्टी बहुजन समाज पार्टी भी पूरी तरह से जनभावना के साथ खड़ी है।

ज्ञपन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में इस दौरान हुई व्यापक हिंसा आगजनी व फायरिंग आदि की घटनाओं के लिए पुलिस और राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों को दोषी ठहराया और उसकी आड़ में बदले की कार्रवाई की। बीएसपी की मांग है कि जो निर्दोष लोग पुलिस बर्बरता का शिकार हुए यानी मारे गए है, उनके परिवार को समुचित सरकारी सहायता दी जाए तथा निर्दोष लोगों को यथाशीघ्र जेल से रिहा करके उन पर लगाए गए गलत मुकदमों को वापस लिया जाए।

मायावती ने रविवार को ट्वीट किया था, उत्तर प्रदेश में सीएए और एनआरसी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में बिना जांच-पड़ताल के ही विशेषकर बिजनौर, सम्भल, मुजफ्फरनगर, मेरठ, फिरोज़ाबाद तथा अन्य कुछ जिलों में निर्दोषों को जेल भेज दिया है। इसे मीडिया ने भी उजागर किया है। यह अति-शर्मनाक और निन्दनीय है।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा था, उत्तर प्रदेश सरकार इन्हें तुरन्त छोड़े और इसके लिए सरकार को अपनी गलती की माफी भी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि इस हिंसा में जिन निर्दोषों की मौत हुई है, राज्य सरकार को उन परिवारों की न्यायोचित आर्थिक मदद भी जरूर देनी चाहिए।

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