नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जो अधिवक्ता सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालती कार्यवाही में भाग नहीं ले पा रहे हैं, वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी एक परिपत्र में कहा गया है कि इस संबंध में वकीलों को हो रही कठिनाई के बारे में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से एक अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है।परिपत्र में कहा गया है, यह स्पष्ट किया जाता है कि उक्त निर्देश राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए थे। हालांकि, इस संबंध में वकीलों को हो रही कठिनाई के बारे में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से एक अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है।
इसमें कहा गया है, तदनुसार, सक्षम प्राधिकारी ने बार के सदस्यों से ऑनलाइन उपस्थित होते रहने की अपील करते हुए स्पष्ट किया है कि जो वकील अपरिहार्य कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग नहीं ले पा रहे हैं, वे माननीय न्यायालयों के प्रत्यक्ष रूप से कार्य करने के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो सकते हैं।
न्यायालय ने 15 मई को सोमवार और शुक्रवार को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामलों की सुनवाई करने का निर्णय लिया था और न्यायाधीशों ने ईंधन के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए आपस में कार-पूलिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करने का ‘सर्वसम्मति से संकल्प’ लिया था। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर अनावश्यक खर्चों में कटौती करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के बाद उठाया गया था।





