एसएनए में कपिला राज की स्मृति में व्याख्यान का आयोजन
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं मंत्री संस्कृति एवं पर्यटन जयवीर सिंह की प्रेरणा तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत एवं उपाध्यक्ष विभा सिंह की कुशल परिकल्पना एवं संयोजन में कथक गुरु कपिला राज की स्मृति में, लोकप्रिय कथक नृत्यांगना देविका देवेन्द्र एस. मंगलामुखी ने, बुधवार को अकादमी परिसर में प्रभावी व्याख्यान-सह-प्रदर्शन दिया। लखनऊ घराने से ताल्लुक रखने वाली देविका देवेंद्र एस. मंगलामुखी ट्रांसजेंडर कथक नृत्यांगना है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार’ से अलंकृत भी किया गया है। रेनू श्रीवास्तव के संचालन में हुए इस कार्यक्रम में अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने कहा कि यह कथक कार्यक्रम, कथक गुरु कपिला राज की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया। उन्होंने कपिला के परिवार से अपनी नजदीकियों का उल्लेख भी इस अवसर पर किया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी निरंतर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परंपरा को न केवल संरक्षण प्रदान कर रही है बल्कि उसे नवांकुरों तक पहुंचाने का महती दायित्व भी सफलतापूर्वक अदा कर रही है। यह आयोजन उसी कड़ी का अहम पड़ाव है। इस अवसर पर उन्होंने देविका देवेंद्र एस. मंगलामुखी का अंगवस्त्र देकर सम्मान भी किया। कथक नृत्यांगना देविका देवेन्द्र एस. मंगलामुखी ने इस अवसर संदेश दिया कि वह अपने को कपिला की शार्गिद मानती है। ऐसे में उन्होंने जो देखा, सीखा और परखा उसी अमूल्य पूंजी को वह आज कथक के नवांकुरों को समर्पित करने आईं है। उनकी अभिलाषा है कि वह ज्यादा से ज्यादा अपनी अर्जित कथक साधना को नई पीढ़ी को सौंपे। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि आलोचना की चिंता कभी नहीं करनी चाहिए। आपके बस में महज कर्म है। अपने कर्म को इतना परवान चढ़ाइए कि उसकी चकाचौंध में सब धूमिल हो जाए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि संसाधनों की कमी का रोना नहीं रोना चाहिए। दृढ़ निश्चय कर बस कदम बढ़ा देने चाहिए। कभी घुटने-घुटने चलने वाला ही भविष्य का महान धावक बनाता है। उन्होंने बताया कि लखनऊ घराने में पैर, जमीन पर कभी तेजी से नहीं धरा जाता है। नृत्य के दौरान केवल घुंघरुओं की आवाज ही श्रोताओं तक पहुंचनी चाहिए। व्याख्यान की कड़ी में उन्होंने एक ओर जहां विभिन्न आमदों के भेद उदाहरण देकर स्पष्ट किए वहीं जयपुर और लखनऊ घराने के चक्कर के अंदाजों का अंतर भी स्पष्ट किया। डगर चलत देखो श्याम कर गहियाँ पर उन्होंने जब विभिन्न नायिकाओं के भेद को बहुत ही बारीकी के साथ स्पष्ट किया तो सभी तालियां बजा उठे। कार्यक्रम की शुरूआत गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु भाव नृत्य से हुयी। इस क्रम में उन्होंने उठान, उपज, थाठ, गत निकास और सवाल जवाब पेश कर न केवल लखनवी घराने की जीवंत झलक पेश की बल्कि कथकाचार्य पंडित लच्छू महाराज और अपनी गुरु कपिला राज की भी दुर्लभ रचनाएं पेश कर प्रशंसा हासिल की। इस प्रस्तुति में गायन में इलियास हुसैन एवं तबला वादन पर अनंत प्रजापति ने प्रभावी साथ दिया।





