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बेंगलुरु में आज से दिखेगा आध्यात्म, संस्कृति व उत्सव का अद्भुत संगम

उत्तर प्रदेश महोत्सव बेंगलुरु के दिल में रंगों को साकार करने के लिए तैयार

लखनऊ। जब उत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत दक्षिण भारत की युवा ऊर्जा से संगीत, अध्यात्म, नृत्य, भोजन और उत्सव के माध्यम से मिलती है, तब एक असाधारण अनुभव जन्म लेता है। ऐसा ही एक अनूठा और भव्य अनुभव अब 21 मई से शुरू हो रहे उत्तर प्रदेश महोत्सव में देखने को मिलेगा, जिसका आयोजन द आर्ट आॅफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, बेंगलुरु में चार दिनों तक किया जाएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक संगम बनने जा रहा है, जहाँ द आर्ट आॅफ लिविंग का शांत और आध्यात्मिक परिसर उत्तर प्रदेश की विरासत, आध्यात्म, कला और स्वादों के रंगों से जीवंत हो उठेगा। इस विशेष पहल के केंद्र में वह व्यापक दृष्टि है, जिसे वैश्विक आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर वर्षों से आगे बढ़ाते रहे हैं — ऐसी दृष्टि, जहाँ संस्कृति, अध्यात्म और समाज क्षेत्रीय सीमाओं से परे जाकर एक सूत्र में जुड़ते हैं। चार दिनों तक आश्रम भक्ति, संगीत और कला के जीवंत उत्सव में परिवर्तित होता दिखाई देगा। लोक प्रस्तुतियाँ, शास्त्रीय राग, मनोहारी कथक नृत्य, आध्यात्मिक कथावाचन, हस्तशिल्प बाजारों की रौनक और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध मिलकर ऐसा वातावरण रचेंगी, जो एक ओर भारतीय परंपरा में गहराई से रचा-बसा होगा और दूसरी ओर आधुनिकता की ताजगी से भी भरपूर। महोत्सव में पद्म भूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्रा, प्रसिद्ध लोकगायिका एवं पद्मश्री सम्मानित उर्मिला श्रीवास्तव, डॉ. रुचि खरे और गीतांजलि जी सहित अनेक ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे। संगीत, नृत्य और कथाओं के माध्यम से बनारस, लखनऊ, मथुरा और पूर्वांचल की समृद्ध कलात्मक परंपराओं को जीवंत किया जाएगा। लोक संस्कृति की मिट्टी से जुड़ी जीवंतता से लेकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गरिमा तक, तथा भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की परंपराओं से प्रेरित रास-आधारित प्रस्तुतियाँ इस महोत्सव की संध्याओं को दृश्यात्मक रूप से भव्य और भावनात्मक रूप से गहन बना देंगी। आगंतुकों को विशेष रूप से तैयार की गई पर्यटन और आध्यात्मिक प्रदर्शनियों को देखने का अवसर भी मिलेगा, जिनमें अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, दीपोत्सव और कुंभ मेले की भव्यता को प्रदर्शित किया जाएगा। इंटरएक्टिव इंस्टॉलेशन और आधुनिक दृश्यात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की पवित्र सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक भूगोल को एक नए, अनुभवात्मक और समकालीन रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। और फिर बात आती है भोजन की जो निस्संदेह इस महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है। मथुरा के पेड़े और आगरा के पेठे से लेकर मसालेदार दालमोठ, नमकीन और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों तक, यह महोत्सव स्वाद की एक प्रामाणिक यात्रा का अनुभव कराएगा। इस अनुभव को और विशेष बनाते हुए आश्रम की रसोई लगभग 2,000 आगंतुकों और निवासियों के लिए उत्तर प्रदेश शैली में विशेष महाप्रसाद तैयार करेगी, जो केवल भोजन नहीं बल्कि राज्य की आत्मीयता और अतिथि-सत्कार की परंपरा का भी परिचय देगा। महोत्सव में उत्तर प्रदेश सरकार के उद्योग एवं टरटए विभाग की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पहल को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। विभिन्न स्टॉल्स के माध्यम से राज्य की विशिष्ट शिल्प परंपराएँ और जिलों की पहचान बने उत्पाद प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें बनारसी सिल्क साड़ियाँ, लखनऊ की चिकनकारी, मिजार्पुर और भदोही के कालीन एवं दरी सहित अनेक हस्तशिल्प उत्पाद शामिल होंगे। इस उत्सव के पीछे एक और गहरी एवं सार्थक साझेदारी भी है। द आर्ट आॅफ लिविंग और उत्तर प्रदेश की विभिन्न संस्थाओं के बीच पिछले कुछ वर्षों में आध्यात्मिक, पर्यावरणीय और सामुदायिक पहलों को लेकर सहयोग लगातार बढ़ा है। अयोध्या के आध्यात्मिक महत्व वाले 108 कुंडों के पुनरुद्धार के लिए द आर्ट आॅफ लिविंग के श्री श्री रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम और अयोध्या नगर निगम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त विद्यालयों, युवा सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अन्य सहयोगों पर भी वर्तमान में चर्चा चल रही है। महोत्सव को और विशेष बनाते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के 22 मई को कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। इसके साथ ही राज्य सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि और कई अन्य गणमान्य अतिथि भी महोत्सव में उपस्थित रहेंगे। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने 14 मई को आश्रम पहुंचकर गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से भेंट भी की थी।

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