लखनऊ। मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े 13 बांग्लादेशी और दो रोहिंग्या समेत कुल 15 अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए एनआईए/एटीएस की विशेष अदालत, लखनऊ ने सोमवार को प्रत्येक को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
एटीएस के अनुसार, इन अभियुक्तों के खिलाफ मानव तस्करी, अवैध घुसपैठ और फर्जी भारतीय दस्तावेज रखने के आरोप में कार्रवाई की गई थी। गिरफ्तार अभियुक्तों में मिथुन मंडल, पिंटू दास उर्फ शाओन अहमद, रोनी पॉल उर्फ मोमीनूर इस्लाम, बापी राय उर्फ मेंहदी हसन, विक्रम सिंह, महफूजुर रहमान, समीर मंडल उर्फ टोनी और मो. जमीन उर्फ हरीश उल्लाह शामिल थे।
विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों के आधार पर असीदुल इस्लाम उर्फ विजय दास, हुसैन मोहम्मद फहद उर्फ मानिक दत्ता, अल अमीन अहमद उर्फ राजेश विश्वास, जैबुल इस्लाम उर्फ गोविंदा दास, राजीब हुसैन उर्फ अजीत दास, सखावत खान उर्फ गोलक मंडल, अलाउद्दीन तारिक उर्फ रिंकू विश्वास, अजय घिल्डियाल, नूर अमीन, खोखन सरदार उर्फ कयूम सिकदर और रतन मंडल के नाम भी सामने आए। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
एटीएस की जांच में खुलासा हुआ कि यह एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह है, जो भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए अवैध तरीके से लोगों को भारत में प्रवेश कराता था। इसके बाद उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। गिरोह के सदस्य जालसाजी के माध्यम से पासपोर्ट बनवाकर बांग्लादेशी नागरिकों को विदेश भेजने का काम भी करते थे।
मामले की विवेचना पूरी कर एटीएस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने सभी 15 अभियुक्तों को अवैध घुसपैठ, जाली दस्तावेज रखने और मानव तस्करी के आरोप में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।





