लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के स्वागत में आयोजित रोड शो अब विवादों में घिर गया है। कार्यक्रम के दौरान भगवान हनुमान के वेश में एक कलाकार द्वारा किए गए नृत्य को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगा है, जिसके बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें एक कलाकार ने भगवान हनुमान के वेश में संगीत की धुन पर नृत्य किया। इसी प्रस्तुति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। एक वर्ग ने इसे धार्मिक आस्था के खिलाफ बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे सामान्य सांस्कृतिक प्रस्तुति करार दिया।
वकील ने भेजी शिकायत, FIR की उठी मांग
मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता और काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन वासु रंजन ने चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भगवान हनुमान के स्वरूप में इस प्रकार का नृत्य करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
VHP ने जताई कड़ी आपत्ति
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय मंत्री अम्बरीश ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनके स्वरूप का इस तरह प्रदर्शन अनुचित है। उन्होंने आयोजकों से भविष्य में इस तरह के मामलों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बता रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन था, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
चूंकि यह कार्यक्रम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत से जुड़ा था, इसलिए मामला राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने भाजपा पर सवाल उठाए हैं, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मनोज उपाध्याय का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों से जुड़े विवाद अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को संयम और जिम्मेदारी से काम लेने की आवश्यकता होती है, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।





