अंर्तराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में नाटक का मंचन
लखनऊ। नगर के प्रतिष्ठित सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति लखनऊ द्वारा भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के 47वें मीटिंग के अन्तर्गत स्वीकृत वित्तीय सहयोग से आयोजित समारोह के तृतीय व अंतिम दिवस में आकांक्षा थियेटर आर्टस, लखनऊ द्वारा सुप्रसिद्ध मूल नाट्य रचना का अनुवादन श्रद्धा बोस द्वारा किया गया द लेसन का नाट्य मंचन निर्देशक तुषार बाजपेयी के कुशल निर्देशन में अंर्तराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में किया गया। नाटक के मंचन से पूर्व उदघाटन एवं दीप प्रज्जवलन डा . अनिल रस्तोगी के अतिरिक्त डा . संजय मेहरोत्रा एवं डा . चंदना मेहरोत्रा द्वारा किया गया। नाटक के कथानक के अनुसार द लेसन एक एकांकी नाटक है। कहानी एक प्रोफेसर, एक छात्रा और एक नौकरानी के इर्द-गिर्द घूमती है। एक दिन 18 साल की एक छात्रा पढ़ाई करने के लिए प्रोफेसर के घर आती है। वह डॉक्टरेट की परीक्षा की तैयारी कर रही होती है। शुरूआत में छात्रा बहुत उत्साहित आत्मविश्वासी और बातूनी होती है। दूसरी ओर प्रोफेसर शांत और विनम्र दिखाई देता है। प्रोफेसर उसे गणित पढ़ाना शुरू करता है। पहले सवाल आसान होते हैं, जिनका छात्रा सही जवाब दे देती है। लेकिन धीरे-धीरे प्रोफेसर कठिन और अजीब सवाल पूछने लगता है। छात्रा उनसे उलझ जाती है और गलतियाँ करने लगती है। इसके बाद प्रोफेसर भाषा और शब्दों (फिलोलॉजी) का पाठ पढ़ाने लगता है। वह लगातार बोलता रहता है और ऐसे-ऐसे तर्क देता है जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता। छात्रा उसकी बातें समझ नहीं पाती। वह थकने लगती है और उसके दाँत में दर्द भी होने लगता है। जैसे-जैसे पाठ आगे बढ़ता है, प्रोफेसर का व्यवहार बदलने लगता है। वह गुस्सैल, कठोर और डरावना हो जाता है। छात्रा कमजोरऔर डरी हुई महसूस करने लगती है। नौकरानी कई बार प्रोफेसर को रोकने की कोशिश करती है, लेकिन वह नहीं मानता। अंत में प्रोफेसर अपना आपा खो देता है और छात्रा की हत्या कर देता है। हत्या के बाद नौकरानी बताती है कि प्रोफेसर पहले भी बहुत-सी छात्राओं की हत्या कर चुका है। लेकिन उसे कोई पछतावा नहीं होता। थोड़ी देर बाद एक नई छात्रा पढ़ने के लिए आ जाती है और नाटक वहीं समाप्त हो जाता है। नाटक में प्रोफेसर की भूमिका में केशव पंडित, मेड की भूमिका में मृदुला भारद्वाज एवं छात्रा की भूमिका ने मिन्नी दीक्षित द्वारा मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया नाटक का सेट डिजाइनिंग तुषार बाजपेयी का था सेट निर्माण राम प्रकाश का था प्रकाश परिकल्पना विकास दुबे का था संगीत संचालन अंकुर सक्सेना का था मंच प्रबन्धक अहमद रजा खान का था।





