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कोरोना संकट की विकट स्थिति से निपटने में योगी सरकार फेल : अखिलेश

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को कहा है कि कोरोना संकट की विकट स्थितियों से निपटने में भाजपा सरकार पूरी तरह विफल रही है। इस महामारी के दौर में बड़ी संख्या में श्रमिक बेरोजगारी की ओर सरकार का ध्यान मामले को टालने का दिखाई देता है। लॉकडाउन में सरकार के जबानी आदेशों के बावजूद लोगों की आजीविका का भी संकट है।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यहां भी अपने चरित्र के अनुसार भविष्य के सुनहरे सपनों में समाज के विभिन्न वर्गों को भटकाने में लग गई है। वह कोरोना संकट से उत्पन्न स्थितियों का न तो सही आंकलन कर पा रही है और नहीं समाधान के सही रास्ते तलाश करने में सक्षम है। उन्होंने ने कहा कि भाजपा सरकार दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाने के मामले में भेदभाव बरत रही है।

सपा मुखिया ने कहा कि अति निम्न वर्ग के गरीबों को कोई पूछने वाला नहीं है। वे भुखमरी झेल रहे हैं। जनता के आक्रोश के डर से भाजपा के कार्यकर्ता मारे शर्म के मुंह छुपाए बैठे हैं। आज जनता समझ गई है कि भाजपा गरीबों और कमजोरों के साथ नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम 11 के पास बेकारों का सही-सही आंकड़ा भी नहीं है, उन्हें यह भी पता नहीं कि कितने अर्ध-बेरोजगार नौजवान है। युवा ऊर्जा को कहां से रोजगार देंगे। यह भी भाजपा को बताना होगा कि करोड़ों को कितने वर्षों में रोजगार मिल सकेगा? जबकि भाजपा सरकार का कार्यकाल डेढ वर्ष ही बचा है।

अखिलेश ने कहा कि भाजपा की राज्य सरकार की टीम-11 ने श्रमिकों को मनरेगा और गांव के दूसरे उद्योगों में खपाने का जो निर्णय लिया है वह पूर्णतया अव्यवहारिक है। उससे प्रदेश में असंतोष और आक्रोश बढ़ेगा। पहले से ही यहां संगठित क्षेत्रों में छंटनी और असंगठित क्षेत्रों में नौकरी के अभाव से बेरोजगारी चरम पर है। जब बेरोजगारी झेल रहे नौजवानों को न तो नौकरी न ही बेकारी भत्ता मिल पा रहा है तो दूसरे राज्यों एवं उत्तर प्रदेश के महानगरों में रोजगार के लिए भटक रहे गांवों के करोड़ों बेरोजगार नौजवानों को कहां से रोजगार में खपाया जा सकेगा? भाजपा की यह जुमलेबाजी इस बार बहुत भारी पड़ेगी।

सपा अध्यक्ष ने शिक्षकों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि लॉकडाउन होने से प्रदेश में पठन-पाठन का कार्य स्थगित है। स्कूल-कालेज बंद है। समाज का प्रत्येक वर्ग कोरोना से निपटने में जुटा हुआ है। जो भी चिकित्सीय और सरकारी दिशा निर्देश है उसका पालन करना सुनिश्चित किया गया है। इस अवधि में राज्य के लाखों वित्तविहीन शिक्षक भी घर में बैठकर लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं, उनके सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। वित्तविहीन शिक्षक वर्ग के वेतन भुगतान की राज्य सरकार ने अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की हैं।

अखिलेश ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों का एक-एक दिन चुनौतीपूर्ण हो गया है। इनके परिवार के भरण-पोषण का संकट आ गया है। यह भी ज्ञातब्य है कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का यह वर्ग पूरी ईमानदारी, मेहनत से शिक्षा के क्षेत्र में निष्ठापूर्वक कार्यरत है।

समाजवादी पार्टी की मांग है कि वित्तविहीन शिक्षकों को राहत पैकेज दिया जाना बहुत ही आवश्यक है। उनको समय से वेतन भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा है कि नौकरी पेशा लोगों, शिक्षकों तथा भूखे-प्यासे लाचार श्रमिकों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार को भेदभाव नहीं करना चाहिए। उनके प्रति सरकार को मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए न्याय करना चाहिए।

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