लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित 16वें दीक्षांत समारोह के उपरांत सायं 7 बजे विश्वविद्यालय के कलामंडपम सभागार में एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध तबला वादक एवं पद्मश्री से सम्मानित पंडित कुमार बोस ने अपनी उत्कृष्ट तबला प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित कुमार बोस ने तीनताल (16 मात्रा) से किया। उनके साथ हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र ने एवं तबले पर रोहेन बोस ने संगत प्रदान की। अपने वक्तव्य में पंडित बोस ने विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की 22 कलाओं में से 16 कलाओं की पूर्णता का उल्लेख किया और इसे ह्यपूर्णताह्ण का प्रतीक बताया। प्रस्तुति के क्रम में उन्होंने आमद, उपज सहित विविध लयकारी का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनकी सशक्त एवं भावपूर्ण तबला वादन प्रस्तुति में लय, ताल एवं नाद का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिसने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से रूबरू कराया। सभागार देर तक तालियों की गूंज से गुंजायमान रहा। इस अवसर पर पद्मभूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्रा, पद्मश्री से सम्मानित मालिनी अवस्थी, स्वरेश्वर बली, विभागाध्यक्ष (गायन) एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. सृष्टि माथुर, विभागाध्यक्ष (तालवाद्य) डॉ. मनोज कुमार मिश्र, विभागाध्यक्ष (नृत्य) ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेई सहित अनेक गणमान्य अतिथि, संगीत प्रेमी, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पश्चात कुलपति प्रो. मांडवी सिंह द्वारा पंडित कुमार बोस को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं कला की समृद्ध परंपरा का संवाहक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह ने 16वें दीक्षांत समारोह के सफल एवं सकुशल आयोजन पर समस्त अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता, बल्कि सांस्कृतिक उन्नयन के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
अंत में कार्यक्रम संयोजक प्रो. सृष्टि माथुर ने सभी अतिथियों, कलाकारों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए 16वें दीक्षांत समारोह के सफल एवं सकुशल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की।
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की अतिथि शिक्षक डॉ. कृतिका त्रिपाठी ने किया। संपूर्ण कार्यक्रम उत्साह, सौहार्द एवं सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।





