भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय का 16वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न
लखनऊ। बुधवार को भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ का 16वाँ दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के कला मंडपम सभागार में अत्यंत गरिमामय एवं भव्य वातावरण में सम्पन्न हुआ। पारंपरिक दीक्षांत शोभायात्रा के साथ आरंभ हुए इस समारोह में विश्वविद्यालय की छात्राओं ने राष्ट्रगीत एवं कुलगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत कर दिया। विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रसिद्ध भाषाविद् प्रो. चितरंजन कर द्वारा रचित तथा विश्वविख्यात भारतीय शास्त्रीय गायक एवं पद्मभूषण से सम्मानित पंडित अजय चक्रवर्ती द्वारा स्वरबद्ध किया गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की संक्षिप्त प्रगति आख्या रखी। उन्होंने कार्यक्रम में आए अतिथियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं भौतिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को प्रदान किए गए लगभग 14 एकड़ भूखंड के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वर्ष 2026 की कुल 255 डिग्रियाँ डिजिटल माध्यम से डिजी लॉकर पर अपलोड की गईं। समारोह में प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, कुलाधिपति के प्रतिनिधि के रूप में उनके विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम. वोबड़े, पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित कुमार बोस की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त मंच पर अपर मुख्य सचिव श्री अमृत अभिजात, कुलसचिव एस. पी. सिंह, गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर एवं नृत्य विभागाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेई उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में कुल 48 पदकों का वितरण किया गया, जिनमें 30 स्वर्ण, 09 रजत एवं 09 कांस्य पदक सम्मिलित रहे। साथ ही 03 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। एम.पी.ए. (कथक नृत्य) की छात्रा श्वेता गुप्ता ने सर्वाधिक 07 स्वर्ण पदक प्राप्त कर विशिष्ट उपलब्धि अर्जित की। तत्पश्चात समूह छायाचित्र (ग्रुप फोटोग्राफ) का आयोजन किया गया।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि यह विश्वविद्यालय सम्पूर्ण भारत का एकमात्र सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर है। विश्वविद्यालय में भारतीय कला, संस्कृति, शास्त्रीय संगीत, लोकगीत, नृत्य, नाट्य, मानविकी को संरक्षित तथा सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी को पहुंचाने का कार्य कर रहा है। दीक्षांत समारोह मेधावी छात्रों के जीवन में विशेषज्ञता के साथ ज्ञान एवं संस्कार का एक चरण है। भविष्य में व्यवहारिक जीवन में चुनौतियों और अवसर दोनों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विश्वविद्यालय से जो ज्ञान, कौशल और संस्कार प्राप्त किये हैं, वह आपको चुनौतियों से निपटने में दक्ष बनायेगें। समाज और राष्ट्र की सेवा में आपकी शिक्षा आपको वैभवशाली बनायेगी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आज जिन मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक प्राप्त हुए हैं। वह आगे चलकर भारत को विश्व गुरू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। अपनी प्रतिभा से स्वयं की पहचान बनायेगे तथा राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के साथ जुड़कर अहम भूमिका निभायेंगे तथा इस विश्वविद्यालय का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा यशस्वी मुख्यमंत्री योगी ने बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये हैं, जिसका परिणाम अब दिखाई देने लगा है। बेटियां जीवन के हर क्षेत्र में पुरूषों से कंधे से कंधा मिलाकर देश का मान ऊॅचा कर रही हैं। देश मोदी जी के नेतृत्व में 11वीं अर्थव्यवस्था से निकलकर अब विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। साथ ही उ0प्र0 बीमारू राज्य की छवि तोड़कर देश का ग्रोथ इंजन बना है। आगे आने वाले समय में एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में उ0प्र0 का अहम योगदान होगा।
कुलाधिपति के प्रतिनिधि के रूप में सुधीर एम. वोबड़े ने कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का संदेश पढ़कर सुनाया तथा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों एवं संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के एक प्रेरक प्रसंग का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति को सुगंध के रूप में निरूपित किया।
अंत में कुलपति द्वारा सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पद्मभूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्रा, पद्मश्री से सम्मानित श्रीमती मालिनी अवस्थी एवं श्रीमती विद्या बिंदु सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। दीक्षांत अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को कुलपति प्रो. मांडवी सिंह एवं पंडित साजन मिश्रा द्वारा डिग्री एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही विश्वविद्यालय के कार्यों में सहयोग देने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह के उपरांत जनभवन, उत्तर प्रदेश के निदेर्शानुसार विश्वविद्यालय के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में माँ-बेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने लगभग 20 छात्राओं की माताओं से संवाद करते हुए पूर्व में कराई गई रक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें उनके स्वास्थ्य की स्थिति से अवगत कराया तथा चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ अत्यंत गरिमापूर्ण वातावरण में हुआ।
200 आंगनबाड़ी किट वितरित की गई
जनभवन, उत्तर प्रदेश के निदेर्शों के अंतर्गत गोद लिए गए ग्रामों के कक्षा 03 से 12 तक आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। गोद ग्राम के बच्चों द्वारा जल एवं पर्यावरण संरक्षण विषयक सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी उपस्थितजनों को विशेष रूप से प्रभावित किया। विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट अध्यापन एवं शैक्षणिक योगदान हेतु गायन एवं स्वरवाद्य विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्मारिका का विमोचन किया गया तथा प्रो. सृष्टि माथुर द्वारा लिखित पुस्तक संगीत सृष्टि का भी विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि पंडित कुमार बोस ने अपने प्रेरक संबोधन में विद्यार्थियों को प्राप्त शिक्षा को आत्मसात करने का संदेश दिया तथा हिंदुस्तानी संगीत को भारतीय संस्कृति के नव-रसों का सार बताते हुए उसकी वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर आंगनबाड़ी केंद्रों हेतु 100 किट विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गईं, जबकि गोंडा जनपद के जिला विकास अधिकारी आदित्य तिवारी एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार द्वारा 200 आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। दोनों अधिकारियों को एचपीवी टीकाकरण अभियान में योगदान हेतु प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही गोद ग्राम कठिंगरा के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को पुस्तकें भेंट की गईं।
मेडल पाने वालों में 69 प्रतिशत लड़कियां
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का 16वां दीक्षांत समारोह स्टूडेंट्स को उनकी अचीवमेंट्स के लिए 48 मेडल दिए गये, जिसमें 30 गोल्ड मेडल, 9 सिल्वर मेडल और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इस साल सबसे ज्यादा 7 मेडल यूनिवर्सिटी में एमपीए (कथक) की स्टूडेंट श्वेता गुप्ता को दिए जाएंगे। इसके साथ ही 3 रिसर्चर्स को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की जाएगी। दीक्षांत समारोह में जो 48 मेडल स्टूडेंट्स को दिए गये, उन्हें हासिल करने वालो में 69 परसेंट गर्ल्स कैंडिडेट्स हैं जबकि 31 परसेंट ब्वॉयज हैं। वहीं, ग्रेजुएशन में 60 परसेंट गर्ल्स और 40 परसेंट ब्वॉयज, पीजी में 50 परसेंट गर्ल्स और 50 परसेंट ब्वॉयज, पीएचडी में 33 परसेंट गर्ल्स और 67 परसेंट ब्वॉयज शामिल हैं। कुल मिलाकर इस बार दीक्षांत समारोह में गर्ल्स का पलड़ा भारी है।
छोटे बच्चों को भी कथक सिखाऊंगी : श्वेता गुप्ता
एमपीए कथक की श्वेता गुप्ता ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं क्योंकि मुझे बचपन से ही डांस से लगाव रहा है। 2019 में मैंने कथक जॉइन किया क्योंकि मुझे लगता है कि ये मेरी संस्कृति से जुड़ा है, जिसे मैं आगे बढ़ाना चाहती हूं। फ्यूचर में भी मैं कथक में ही आगे बढ़ूंगी और साथ ही छोटे बच्चों को भी कथक सिखाऊंगी ताकि ये कल्चर आगे बढ़ता रहे।
मैं फ्यूजन म्यूजिक प्रोडक्शन करना चाहती हूं : नेहा काजी
एमपीए गिटार की नेहा काजी ने कहा कि दीक्षांत समारोह में मुझे 5 मेडल मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है। इससे पहले इस कैटेगरी में किसी फीमेल को गोल्ड मेडल नहीं मिला था, जो दोगुनी खुशी की बात है। इससे पहले मुझे बीपीए में भी गोल्ड मिला था। मेरा सफर 9 साल पहले शुरू हुआ था। अभी मुझे काफी कुछ एक्सप्लोर करना है। मैं फ्यूजन म्यूजिक प्रोडक्शन करना चाहती हूं।
बचपन से ही गाने का काफी शौक था : प्रिया दुबे
बीपीए गायन की प्रिया दुबे ने कहा कि मुझे दीक्षांत समारोह में 4 मेडल मिल रहे हैं, जिसको लेकर मैं बहुत खुश हूं और अपने पेरेंट्स, टीचर्स और ईश्वर को थैंक्स कहती हूं। मुझे बचपन से ही गाने का काफी शौक था, लेकिन मेरा बैकग्राउंड म्यूजिक का नहीं था तो मुझे काफी चीजें फेस करनी पड़ीं, पर फिर भी मैंने अपने पैशन को नहीं छोड़ा और आज मैं बहुत अच्छा फील कर रही हूं।
पीएचडी करके प्रोफेसर बनना चाहता हूं : स्पर्श कुमार कश्यप
एमपीए गायन के स्पर्श कुमार कश्यप ने कहा कि मुझे बचपन से ही गाने का शौक था और 2018 में मैंने भातखंडे जॉइन किया था, जिसके बाद मैंने काफी मेहनत की जिसकी वजह से मुझे 4 मेडल्स मिल रहे हैं। ये मेरे लिए बहुत स्पेशल मोमेंट है। मुझे इसी फील्ड में रहना है। मैं पीएचडी करके प्रोफेसर बनना चाहता हूं।
इंटरनेशनल आर्टिस्ट बनना चाहता हूं : आलोक कुमार मिश्रा
एमपीए गायन के आलोक कुमार मिश्रा ने कहा कि दीक्षांत समारोह में 4 मेडल्स मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। मैं आजमगढ़ के हरिहरपुर संगीत घराने से बिलॉन्ग करता हूं और मेरे यहां सभी म्यूजिक से जुड़े हैं। संगीत तो मुझे विरासत में मिला है। अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैं इंटरनेशनल आर्टिस्ट बनना चाहता हूं।
भरतनाट्यम से मुझे बेहद प्यार है : दीप्ति सिंह
एमपीए भरतनाट्यम की दीप्ति सिंह ने कहा कि भरतनाट्यम से मुझे बेहद प्यार है क्योंकि इसे करने से मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है। मैंने अपनी पूरी पढ़ाई करने के बाद टीचिंग की जॉब छोड़कर दोबारा बीपीए, एमपीए किया और भरतनाट्यम शुरू किया। अब दीक्षांत समारोह में मुझे 3 मेडल मिल रहे हैं, जो मेरे लिए बहुत हैप्पी मोमेंट है।





