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नाटक में दिखी सामाजिक संवेदनाओं की चिंताजनक तस्वीर

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में छोड़ो कल की बातें नाटक का मंचन
लखनऊ। श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति की ओर से गोमती नगर के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में छोड़ो कल की बातें नाटक का मंचन हुआ। परिकल्पना एवं निर्देशन अनुपम बिसारिया का रहा। नाट्य रचनाकार जेपी सिंह (जयवर्धन) की इस नाट्य कृति छोड़ो कल की बातें में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सामाजिक संवेदनाओं की चिंताजनक तस्वीर को दर्शकों के सामने खींचा। नाटक में संयुक्त परिवारों में सबका एक-दूसरे प्रति व्यवहार के प्रति सम्मान, एक दूसरे के प्रति व्यवहार के प्रति उदासीनता को रेखाकिंत किया गया है। नाटक में बताया गया है कि हमारी संवेदना धीरे-धीरे कम होती जा रही है। कटु शब्दों में कहा जाए तो हमारी संवेदना मरती जा रही हैं। दरअसल हम आत्म केंदित होते जा रहे हैं। भौतिकता की दौड़ में नैतिकता का ह्रास हो रहा है। यही कारण है कि परोपकार, सहयोग, सहायता और दया की भावना आदि शब्द प्राय: निरर्थक होते जा रहे हैं। अपने देश में बढ़ते वृद्धाश्रम, विधवाश्रम और अनाथालय निजी संबंधों व संवेदनाओं की चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। अपने घर के रहन-सहन को छोड़कर बुढ़ापे में एक वृद्धाश्रम के रहन-सहन में अपनी विवशता को रेखाकिंत करता है। वृद्धाश्रम कोई भी स्वेच्छा से नहीं आता है। नाटक प्रधान भूमिका टप्पू की भूमिका में आदित्य वर्मा, जगन लाल की भूमिका में अश्वनी मक्खन, घनश्याम की भूमिका में राजेश मिश्रा, महावीर की भूमिका में अनुपम बिसारिया एवं उमा देवी की भूमिका अनीता वर्मा ने अपने किरदारों को बाखूबी मंच पर साकार कर दिया। सेट डिजाइनिंग नदीम अंसारी एवं असगर अली का था सेठ निर्माण असगर वेग, सुब्रोतो बोस एवं फैजान वेग का था मंच व्यवस्था विनीता अवस्थी, गौतम राय एवं प्रणव का था पूर्वा अभ्यास अजय कक्कर तथा प्रस्तुतकर्ता अशोक सिन्हा कार्यशाला निर्देशन में प्रभात कुमार बोस, उ०प्र० संगीत नाटक अकादमी अवार्डी के सशक्त निर्देशन में संचालित किया गया रूप सज्जा अशिका क्रियेशन का था वस्त्र विन्यास रोजी दुबे मिश्रा का था प्रकाश परिकल्पना का कमान देवाशीष मिश्रा ने बहुत ही प्रभावी ढंग से किया सगीत निर्देशन व संचालन योगेश शुक्ला का था यह नाटका प्रस्तुति कन्सर्ड थियेटर लखनऊ का था सम्पूर्ण परिकल्पना एव निर्देशन अनुपम बिसारिया का था कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है यह नाटक रंग दर्शकों पर अपना विशेष प्रभाव डाल गया।

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