सांस्कृतिक विरासत के प्रति एक बुलंद आवाज उठाई गई
लखनऊ। नवाबों के शहर में आज संस्कृति, आस्था और मिट्टी की सोंधी खुशबू का एक अनोखा संगम देखने को मिला। मौका था सरायमालीखां (कोनेश्वर चौक, लखनऊ) में एक बैठक का। सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘एलायंस सोशल एण्ड कल्चरल सोसाइटी’ के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में सिर्फ चर्चा नहीं हुई, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति एक बुलंद आवाज उठाई गई, गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग। बैठक में संस्था के अध्यक्ष दिलावर हुसैन ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गाय सिर्फ एक जीव नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्मांड है, जिसके शरीर में 33 कोटि (33 प्रकार के) देवी-देवता निवास करते हैं। वेदों और पुराणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गाय ‘कामधेनु’ है, जो हर इच्छा को पूरी करने वाली ममता की मूरत है। गाय से मिलने वाले पंचगव्य के बिना धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ अधूरे हैं। वेदों की ऋचाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि गाय को संपूर्ण विश्व की माता का दर्जा प्राप्त है। गाय के प्रति सम्मान और उसका संरक्षण हमारी जीवनशैली का आधार है। इसके इसी विराट और सर्वव्यापी महत्व को देखते हुए हम उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री से ससम्मान अनुरोध करते हैं कि वह गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की पहल करें। राकेश पाल ने गाय के आर्थिक और कृषि संबंधी महत्व पर रोशनी डाली। ‘गौ माता’ के सम्मान में मोहम्मद अशफाक, असलम जावेद सिद्दीकी और शाद सिद्दीकी जैसे तमाम प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे।





