‘चबूतरा थियेटर फेस्टिवल’ के दूसरे दिन नाटक ‘वाइफोफोबिया’ का मंचन
लखनऊ। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मदर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित ‘चबूतरा थियेटर फेस्टिवल’ (सीजन 10) के दूसरे दिन गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान सभागार में हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाटक ‘वाइफोफोबिया’ का शानदार मंचन किया गया। डॉ. राकेश ऋषभ द्वारा लिखित और प्रख्यात रंगकर्मी महेश चंद्र देवा के नाट्य परिकल्पना एवं निर्देशन में सजे इस नाटक ने दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ गंभीर सामाजिक संदेश भी दिया। नाटक ‘वाइफोफोबिया’ पुरुष प्रधान समाज और वैवाहिक जीवन के अंतर्विरोधों पर आधारित एक करारा व्यंग्य है। कहानी ‘वाइफोफोबिया’ (पत्नी का डर या खौफ) नामक एक काल्पनिक मनोवैज्ञानिक स्थिति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिससे पीड़ित होकर पुरुष अजीबोगरीब परिस्थितियों में फंस जाते हैं। नाटक में दिखाया गया है कि कैसे शादीशुदा जिंदगी के तनाव, संवादहीनता और समाज के दबाव के कारण मगनलाल जैसे आम पुरुष इस ‘फोबिया’ का शिकार हो जाते हैं।
जब वे अपनी इस अनोखी समस्या को लेकर डॉ. मरणेंद्र और उनके अजीब कंपाउंडर झोकेंद्र के पास पहुंचते हैं, तो अस्पताल के भीतर हास्य और भ्रम का एक नया सिलसिला शुरू होता है। वहीं दूसरी ओर, एडवोकेट टूटन सिंह और फूूटन सिंह जैसे चरित्र मामले को कानूनी और सामाजिक रूप से और उलझा देते हैं। पत्नी शांति देवी का डर -भय तलाक तक आ जाता है दोनों का द्वंद्व इतना बढ़ जाता है कि शांति मगन को मार देती है लेकिन ये सब सपने में होता है क्योंकि कि वाईफोफोबिया की पुस्तक पढ़ रहा होता है। बच्चे मिली और लिली ओर पत्नी कहते है कि क्या बात है तो सपने में डर भय और वाइफ के डर को बताता है कि भगवान बचाए इस वाईफोफोबिया से…. नाटक बेहद हल्के-फुल्के और हास्यास्पद अंदाज में यह संदेश देता है कि वैवाहिक जीवन में डर या खौफ की नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और प्रेम की जरूरत होती है। नाटक में अहम भूमिका शान्ति देवी- अमृता सिंह राजपूत, मगनलाल- रूपल अग्रवाल,ननकऊ भईया / मरीज- कुलदीप श्रीवास्तव डॉ. मरणेंद्र- उन्नत बहादुर सिंह, एडवोकेट टूटन सिंह-राहुल प्रताप सिंह, राम दुलारे / फूटन सिंह / मरीज- के.के. पाण्डेय, कम्पाउंडर झोकेंद्र- आदित्य कुमार , चमेली पड़ोसन -लता बाजपेई, बेटी मिली-अगम्या बाजपेईऔर छोटी बेटी लिली – का किरदार हर्षिका श्रीवास्तव ने निभाया।





