लखनऊ। नवनीत नीरव की पकड़ फिक्शन और नॉन-फिक्शन, दोनों विधाओं में समान रूप से सशक्त है। बच्चों, युवा पाठकों और वयस्कों के लिए लिखी गई उनकी रचनाएँ सहज ही पाठक को अपने साथ जोड़ लेती हैं। उनकी किसी भी रचना को पढ़ना शुरू कीजिए, उसे अंत तक पढ़ने के लिए आपको अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता, उनकी भाषा, कथन शैली और संवेदनाएँ स्वत: ही पाठक के भीतर अपनी जगह बना लेती हैं। यह उनके अनूठे कहन का ही कमाल है। जब वे स्वयं अपनी रचनाओं का पाठ करते हैं, तो श्रोता उनके शब्दों और अनुभवों की दुनिया में उनके साथ-साथ विचरण करने लगते हैं। नवनीत जी की एक खास बात है कि वे साहित्य को एक गहरे समर्पण और सामाजिक दायित्व के साथ रचते हैं। यह समर्पण इस बात से भी दिखता है कि वे केवल बाल साहित्य की रचनाएँ ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसके इर्द-गिर्द एक गंभीर विमर्श और सृजनात्मक परिवेश भी निर्मित कर रहे हैं। इस प्रयास से देश में बाल साहित्य का एक सशक्त इकोसिस्टम विकसित हो रहा है, जहाँ नए रचनाकारों को मंच और दिशा मिल रही है। उनका यह कहानी संग्रह भी उनकी रचनात्मक क्षमता का प्रमाण है। इसकी । हर कहानी पढ़ने के बाद लंबे समय तक पाठक के संसार में अपनी जगह बनाती है।





