वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रामा सेंटर से लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का ऑपरेशन कराने आई 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला की गलत सर्जरी के बाद मौत हो गई। मृतका की पहचान अमृतपुर निवासी राधिका देवी के रूप में हुई है, जिन्हें 25 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन करने के बजाय उनकी जांघ की सर्जरी कर दी। गलत ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और इलाज के दौरान 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया।
हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना ‘नाम’ के कन्फ्यूजन की वजह से हुई। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, उस वक्त अस्पताल में राधिका नाम की दो मरीज भर्ती थीं। दूसरी महिला (82 वर्ष) ऑर्थोपेडिक विभाग में पैर में फ्रैक्चर के इलाज के लिए आई थीं। डॉक्टरों ने गलतफहमी में ट्यूमर पीड़ित राधिका देवी के पैर का ऑपरेशन कर दिया। जब जांघ में कोई फ्रैक्चर नहीं मिला, तो टांके लगाकर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। स्थिति बिगड़ने पर 18 मार्च को उनका दोबारा ऑपरेशन भी किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक एस. एन. शंखवार ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इस चूक के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





