पटना। बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव की संभावना है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस कदम के साथ ही राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख नीतीश कुमार, जिन्होंने हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है, सुबह 11 बजे निर्धारित कैबिनेट की अंतिम बैठक के बाद अपना त्यागपत्र सौंप सकते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल ने इसे एक संवैधानिक प्रक्रिया बताया है। वर्तमान में 243 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है और दोपहर 3 बजे भाजपा कार्यालय में विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए बैठक बुलाई गई है।
नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्यवेक्षक के रूप में पटना पहुंच रहे हैं। 202 विधायकों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जदयू, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तान आवामी मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे दल शामिल हैं। शाम 4 बजे विधानसभा के केंद्रीय कक्ष में सभी राजग विधायकों की एक संयुक्त बैठक होगी, जिसके बाद राज्यपाल के समक्ष नई सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है, हालांकि राजनीतिक गलियारों में किसी अप्रत्याशित चेहरे की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
इस बीच, जदयू खेमे में नीतीश कुमार की भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। निवर्तमान मंत्री जमा खान के अनुसार, नीतीश कुमार ज्यादातर समय बिहार में ही रहकर नई सरकार का मार्गदर्शन करेंगे और केवल संसद सत्र के दौरान ही दिल्ली जाएंगे। इसके साथ ही ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत, जो हाल ही में राजनीति में सक्रिय हुए हैं, उन्हें नई सरकार के ढांचे में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। कुल मिलाकर, आज की ये गतिविधियां बिहार में दशकों से चली आ रही नीतीश-केंद्रित राजनीति के एक नए अध्याय की ओर इशारा कर रही हैं।





