लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक चारबाग रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां के प्लेटफार्म नंबर पांच पर सुबह करीब 8.15 बजे एक भारी-भरकम टिन शेड अचानक भरभरा कर नीचे गिर गया। इस दर्दनाक हादसे की चपेट में आने से ड्यूटी पर तैनात एक रेल टिकट परीक्षक (टीटीई) और दो यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। शेड गिरते ही प्लेटफार्म पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल , राजकीय रेलवे पुलिस और स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे तीनों घायलों को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस के जरिए आलमबाग स्थित अजंता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रही है।
हादसे के समय कोलकाता से देहरादून जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस (हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस) प्लेटफार्म नंबर पांच पर ही आने वाली थी और बड़ी संख्या में यात्री वहां ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक शेड का करीब 60 से 70 फीट लंबा हिस्सा तेज आवाज के साथ ढह गया और उसका अगला सिरा रेलवे ट्रैक की तरफ जाकर टिक गया। इस मलबे के नीचे टीटीई अमित (भूपेंद्र) और यात्री अखिलेश व साहिल बुरी तरह दब गए। हादसे में टीटीई के पैर में गंभीर फ्रैक्चर आया है और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है, जबकि एक यात्री का कंधा और दूसरे का हाथ गंभीर रूप से चोटिल हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही डीआरएम सुनील कुमार वर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना।
इस हादसे के चलते चारबाग स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ। प्लेटफार्म नंबर पांच पर आने वाली कुंभ एक्सप्रेस को घटना के तुरंत बाद आउटर पर ही रोक दिया गया। प्लेटफार्म से मलबा हटाने और स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रेन को 1 घंटे 44 मिनट की देरी से सुबह 8.58 बजे प्लेटफार्म पर लाया जा सका, जिसके कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रेलवे प्रशासन ने ट्रैक को साफ करने के लिए मौके पर क्रेन बुलाई। बता दें कि चारबाग स्टेशन पर इन दिनों रेल भूमि विकास प्राधिकरण द्वारा पुनर्विकास और विश्वस्तरीय कॉन्कोर्स (हवाई अड्डे जैसा मुख्य हॉल) निर्माण का काम चल रहा है, जिसके तहत प्लेटफार्म संख्या चार को पहले ही बंद किया जा चुका था।
निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की लापरवाही आ रही सामने
प्राथमिक जांच में इस पूरे हादसे के पीछे निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की घोर लापरवाही सामने आ रही है। स्टेशन पुनर्विकास के काम के तहत प्लेटफार्म पांच के कुछ हिस्सों और पुराने शेड को हटाया जाना तय था। आरोप है कि चूंकि इस शेड को हटाया जाना था, इसलिए स्टेशन प्रशासन और ठेकेदार ने इसकी मरम्मत और नियमित देखभाल को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। लंबे समय से रखरखाव न होने के कारण शेड के किनारों पर लगे लोहे के सपोर्ट में जंग लग चुका था, जो अंततः इतने बड़े हादसे का कारण बना। हादसे को गंभीरता से लेते हुए उत्तर रेलवे के डीआरएम ने घटना के उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्य अभियंता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया गया है, जो इस सुरक्षा चूक के तकनीकी कारणों और लापरवाही की रिपोर्ट सौंपेगी।





