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श्रद्धा व सत्कार से मनाया गया श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व

लखनऊ। जुगो-जुग अटल साहिब श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी महाराज के प्रकाश पर्व सिख सेवक जत्थे एवं श्री गुरु सिंह सभा की ओर से ऐतिहासिक गुरूद्वारा श्री गुरु नानक देव जी नाका हिण्डोला सहित लखनऊ के सभी गुरुद्वारों में बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया।
प्रात: का कार्यक्रम शबद चौकी से आरम्भ हुआ जिसमें पारम्परिक वेशभूषा में सुसज्जित पांच प्यारों की अगुवाई में पुरूष, महिलाएं व बच्चे फूलों से सुसज्जित भव्य पालकी साहिब में विराजमान श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी को अपने कन्धों पर उठाकर शबद कीर्तन, वाहिगुरू का जाप करते सुगन्धित इत्र व फूलों की बरखा कर रहे थे। शबद चौकी के मार्ग को गुब्बारों के साथ बड़ी खूबसूरती से सजाया गया था गुब्बारों, फूलों एवं बिजली की झालरों के साथ सजाए गये दीवान हाल में श्री गुरू ग्रन्थ साहिब का प्रकाश किया गया।
गुरुद्वारा सदर में भी साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहब का प्रकाश पर्व मनाया गया। ज्ञानी हरविंदर सिंह ने साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का इतिहास कैसे स्थापना की गई उसका विवरण कथा के माध्यम से संगत के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 1604 में साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहब जी का कलमबद करने का कार्य भाई गुरदास जी ने किया था ,एवम गुरु अर्जन देव जी ने 5 गुरुओं भक्तों एवम भट्टों की वाणी को 30 रागों में संग्रहित कर पोथी साहिब के रूप मे स्थापित कर हरमिंदर साहिब अमृतसर में बाबा बुड्डा जी को पहला ग्रंथी मनोनीत किया।

गुरुद्वारे की हजूरी रागी भाई प्रीतम सिंह एवं सहयोगियों द्वारा से संगत को निहाल किया गया सदर हरपाल सिंह जग्गी कार्यकारी अध्यक्ष लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपने उध्बोधन में कहा कि 1604 ईस्वी में पांच सिक्ख गुरु, भक्तों एवम भट्टों की वाणी को समाहित कर साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज की स्थापना की । प्रथम ग्रंथि के रूप में बाबा बुड्ढा जी को ग्रंथि मनोनीत किया गया भारत के संविधान के अनुसार साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को जिंदा गुरु के रूप में स्वीकारा गया है श्री गुरु गोविंद सिंह पिता महाराज जी ने इसके बाद 1708 में नवें गुरु तेग बहादुर की वाणी को जै जै वंती राग में समाहित करके 11 वे गुरु के रूप सम्पूर्णत: देते हुए में स्थापित किया। इस के बाद दैहिक गुरु की प्रथा को समाप्त कर दिया। सम्पूर्ण ग्रंथ साहिब 31 रागों में दर्ज है। आज के दिन को ग्रंथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। स तेजपाल सिंह रोमी अध्यक्ष ने अवगत कराया की आज इस पवित्र पवन दिन में चरणजीत कौर गांधी को उप महापौर बनने पर उनको एवम पूर्व पार्षद को सम्मानित किया गया। स इंदर सिंह उपाध्यक्ष ने अवगत कराया की दीवान के उपरांत गुरु का लंगर वरतया गया।

शबद कीर्तन सुन संगत हुई निहाल
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में आज 24 अगस्त को सायं: 7.00 बजे से 11:00 बजे तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉ गुरमीत सिंह के संयोजन में विशेष रूप से श्री दरबार साहब श्री अमृतसर से आए भाई कमलजीत सिंह जी ने शबद कीर्तन द्वारा संगतो को निहाल किया। देर रात्रि तक गुरु का लंगर एवं मिष्ठान प्रसाद वितरित किया गया।

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