नई दिल्ली। ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई झड़पों के बाद राजधानी में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजीपी) का जंतर-मंतर पर धरना मंगलवार को 24वें दिन भी जारी रहा। संगठन ने साफ किया है कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।इधर, दिल्ली पुलिस ने हिंसा के मामले में कार्रवाई तेज करते हुए अब तक पांच एफआईआर दर्ज की हैं और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
सुरक्षा कड़ी, प्रदर्शनकारी फिर लौटे धरना स्थल
सोमवार को हुई झड़प के बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई जगह बैरिकेडिंग की गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घायल प्रदर्शनकारी भी फिर से धरना स्थल पर पहुंचने लगे हैं।
वार्ता पर टकराव: दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
सीजीपी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही। संगठन ने आरोप लगाया कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया।वहीं, सरकार का दावा है कि बातचीत का प्रस्ताव प्रदर्शनकारियों की ओर से आया था, जिस पर राजनीतिक विवाद भी गहराता दिख रहा है।
हिंसा की जांच तेज, CCTV से पहचान
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट समेत कई थानों में दर्ज एफआईआर में पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान और पुलिस पर हमले जैसे आरोप शामिल हैं।सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और एफआईआर भी दर्ज हो सकती हैं।
सोनम वांगचुक की हालत स्थिर, इलाज जारी
सफदरजंग अस्पताल के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्होंने अब भी नसों के जरिए द्रव और ग्लूकोज लेने से इनकार किया हुआ है।डॉक्टरों की संयुक्त टीम उनकी निगरानी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार उनका ब्लड शुगर स्तर सामान्य से कम है और पोटेशियम भी कम पाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में गूंजा प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को विदेशी मीडिया में भी प्रमुखता से जगह मिली है। रिपोर्टों में इसे युवाओं की बढ़ती चिंताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों के रूप में देखा जा रहा है।
सियासी बयानबाजी तेज
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संवाद किसी भी लोकतंत्र की पहली शर्त होता है, लेकिन सरकार ने समय रहते पहल नहीं की। उन्होंने इसे अहंकारी रवैया करार दिया।





