लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के बहाने भी पूर्व सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। योगी ने कहा कि सरकारों के कार्यकाल में शिक्षकों ने ऐसी क्या शिक्षा दी कि छात्र आज देश विरोधी नारे लगा रहे हैं। अब शिक्षक अपने कार्यों का मूल्यांकन करें कि उनके द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थियों में विकृति क्यों पैदा हुई? आज विश्वविद्यालयों में जो भारत विरोधी नारे लग रहे हैं, यह जो उच्छृंखलता है, उस पाप का भागी कौन है? क्या सरकारें हैं?
मुख्यमंत्री बुधवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विवि में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार-मिशन प्रेरणा एवं सीएसआर कांक्लेव के दो दिवसीय आयोजन के शुभारम्भ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कॉन्क्लेव के लिए कॉरपोरेट से आए प्रतिनिधियों धन्यवाद देते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की योजना कहीं बाहर से नहीं आई। यह तत्कालीन विशेष सचिव और वर्तमान समय में बरेली के जिलाधिकारी ने श्रावस्ती के जिलाधिकारी के रूप में कुछ विद्यालयों को जनसहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ाने का कार्य किया था।
उन्होंने कहा कि सरकारें तो केवल संसाधन दे सकती हैं।देश को स्वर्णयुग में पहुंचाने वाले आचार्य चाणक्य का भाव एक शिक्षक का आदर्श होना चाहिए। समाज की चुनौतियों और आवश्यकताओं के प्रति अगर हम खड़े नहीं हो सकते तो हम अपने प्रति, अपने पेशे के प्रति, वर्तमान और भावी पीढ़ियों के प्रति भी अन्याय कर रहे होंगे एक शिक्षक राष्ट्र का भाग्य विधाता होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को अपने सामने आचार्य चाणक्य का उदाहरण रखते हुए स्वयं को तैयार करना चाहिए।
आचार्य चाणक्य ने भारत को तत्कालीन विश्व की एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। एक शिक्षक को सर्वज्ञ होना चाहिए। हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षकों की ऐसी श्रृंखला होनी चाहिए, जिससे वे अपने सामने आने वाली चुनौतियों से भागने की बजाए उनसे जूझने के लिए तैयार हो सकें। मुख्यमंत्री ने बताया किढाई वर्ष पहले मैंने बेसिक शिक्षा परिषद से कहा कि पुराना पाठ्यक्रम हटाकर एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए जो आधारभूत कार्य किसी क्षेत्र में किया जाना चाहिए, वह है शिक्षा के क्षेत्र में समानता लाना। जब प्रदेश के सभी बच्चों को वह समान अवसर प्राप्त होंगे, जिसके लिए सभी परिवार आकांक्षा रखते हैं
अगले चरणों में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत हमने इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज, पुस्तकालय, फर्नीचर देने की व्यवस्था की गई।
ऑपरेशन कायाकल्प में पिछले 3 वर्षों में हम 92,000 विद्यालयों को वो बुनियादी विकास दे चुके हैं, जो बहुत पहले हो जाना चाहिए था हमने बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े 1 लाख 58 हजार विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के लिए ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ का आरंभ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले चरण में इन विद्यालयों में अच्छी फर्श बनाने की व्यवस्था, बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट निर्माण, पेयजल व लाइट की व्यवस्था की गई प्रदेश की सत्ता अपने हाथों में लेने के समय चारों ओर अराजकता और अव्यवस्था का वातावरण था। इसमें सबसे खराब स्थिति बेसिक शिक्षा की स्थिति थी। प्रॉक्सी टीचर्स की एक समस्या चल रही थी। इस पर रोक लगाने की कार्रवाई पहले चरण में ही प्रारंभ की गई।
उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार और सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षा से अनुराग रखने वाले महानुभाव व शिक्षा जगत के भाइयों-बहनों को मैं बेसिक शिक्षा परिषद को इस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देता हूं ‘मिशन प्रेरणा’ में लर्निंग आउटकम और सपोर्टिव सुपरविजन की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा ने अपने नवाचारों पर साहित्य यहां प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही शिक्षकों को नए सिरे से ध्यान देना होगा कि बच्चों के पाठ्यक्रम को पढ़ाना कितना सरल बनाया जा सकता है। उद्धरणों तथा उदाहरण के माध्यम से पढ़ाई कर विद्यार्थी आगे बढ़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि शिशु स्वस्थ है, पढ़ने लायक है, तो उसे स्कूल जाना सिखाएं। भारत की आने वाली पीढ़ी के साथ न्याय का गुरुतर दायित्व बेसिक शिक्षा परिषद पर है आंगनबाड़ी में जो बच्चे जाते हैं उनके लिए प्री-प्राइमरी की व्यवस्था लागू करनी होगी। 5 वर्ष की उम्र में ही विद्यालय में एडमिशन की व्यवस्था को समाप्त करनी होगी।
मुख्यमंत्री इस दौरान 350 कस्तूरबा गांधी विद्यालय की कक्षा 9 से 12 के उच्चीकरण के लिए 788 करोड़ की लागत के भवनों का शिलान्यास किया। इसके अलावा उन्होंने बुनियादी शिक्षा में सुधार एवं समग्र विकास तथा ‘आॅपरेशन कायाकल्प’ से संबंधित जानकारियों के प्रचार-प्रसार क लिए एलईडी वैन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।





