जगरानी पांडेय स्मृति सम्मान से मंजुला दीक्षित सम्मानित
लखनऊ। पं. गंगारत्न पाण्डेय जी 109वीं जयंती सम्मान समारोह, 2026 का आयोजन हिंदी संस्थान, उ.प्र. के निराला सभागार में किया गया। पं. गंगारत्न पाण्डेय साहित्य शिरोमणि सम्मान, 2026 प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित एवं जगरानी पाण्डेय स्मृति सम्मान, 2026 मंजुला दीक्षित जी को प्रदान किया गया। प्रो. दीक्षित ने कहा कि पाण्डेय जी का जीवन अत्यंत संघर्ष पूर्ण रहा। वे कुशाग्र विद्यार्थी, वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षक एवं अधिकारी रहे, परंतु इससे भी बढ़कर वे एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। उन्हें कभी पद लोलुपता नहीं रही, इसीलिए स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया परन्तु आजादी के बाद राजनीति से किनारा कर लिया। उनके जैसा व्यक्तित्व दुर्लभ है। मैं बहुत प्रसन्न हूं कि मुझे उनके नाम से सम्मान दिया जा रहा है, मैं इस समिति के सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पद्मश्री डॉ विद्याविंदु सिंह ने कहा कि पाण्डेय जी का व्यक्तित्व और कृतित्व अत्यंत प्रेरक है। सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धांत को उन्होंने जीवन में अपनाया। वे कर्मठ और जुझारू स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और शब्द ब्रह्म के मौन आराधक थे। स्वभाव से स्नेही थे कि जो भी उनसे एक बार मिलता तो सदा के लिए उनसे जुड़ जाता था। आज इस अवसर पर उनकी स्मृति को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूं। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि साहित्य और देश के अर्पित ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं प्रणाम करता हूं और उनके नाम से ये पुरस्कार जिनको दिया जा रहा है, वह सर्वथा इसके सुयोग्य है। गुरुवर दीक्षित जी से हम सभी भलीभांति परिचित हैं। दीक्षित को इस ऊंचाई तक ले जाने में मंजुला दीक्षित का योगदान अवश्य ही रहा है, उन्हें सम्मान दिया जाना बहुत ही अभिभूत करने वाला है। ऐसा बहुत कम होता है कि उसे सम्मान दिया जाए जो किसी को आगे बढ़ाए। वास्तव में नींव की ईंट तो वही है। इस अवसर पर गंगारत्न पाण्डेय जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर डॉ उमाशंकर शुक्ल शितिकण्ठ, डॉ गोपाल कृष्ण शर्मा ‘मृदुल’, अवधेश गुप्त ‘नमन’ जी सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। श्री अशोक कुमार पाण्डेय ‘अशोक’, डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी, इं. सुनील कुमार वाजपेयी तथा नवीन शुक्ल ‘नवीन’ ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में मुनेन्द्र शुक्ल, डा. उमेश चंद्र श्रीवास्तव, अनिल मिश्र, सुशील कुमार श्रीवास्तव, डॉ. योगेश गुप्त, तारावती विद्या’, ऋतुराज पांडेय ‘ऋषि’, आशुतोष पाठक, नेहा पाठक ‘प्रीति’, सक्षम, मनमोहन बाराकोटी, मृत्युंजय प्रसाद गुप्ता, सुनाक्षी, शिशिर नवीन आदि की उपस्थिति रही। शुभारंभ माँ वीणा पाणि की प्रतिमा, गंगारत्न पांडेय, जगरानी पांडेय के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन एवम् डॉ. मोनिका पाठक द्वारा प्रस्तुत वाणी-वंदना से हुआ। इसका सफल संचालन डॉ. रश्मिशील शुक्ला, संयोजन आवारा नवीन व नवीन शुक्ल ‘नवीन’ तथा धन्यवाद ज्ञापन समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय ‘अशोक’ ने किया।





