देशभर से पहुंचे छात्र, सीबीएसई मूल्यांकन, सीयूईटी देरी और सरकारी-प्राइवेट स्कूलों के अंतर पर जताई नाराजगी; संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज के बाद और तेज हुआ आंदोलन
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। कोई माता-पिता से झूठ बोलकर घर से निकला, तो कोई सीधे स्कूल की यूनिफॉर्म में ही प्रदर्शन स्थल पहुंच गया। लगातार बढ़ती छात्र-छात्राओं की भीड़ यह संकेत दे रही है कि उनका आक्रोश केवल NEET-UG 2026 पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरे भारतीय शिक्षा तंत्र में सुधार की मांग कर रहे हैं।
जंतर-मंतर पर जुटे छात्र-छात्राएं सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया, सीयूईटी परीक्षा की अनियमितताओं और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में हो रही देरी जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। कई छात्र अपने परिवार या दोस्तों के साथ यहां पहुंचे हैं, जबकि कुछ दूर-दराज के राज्यों से आकर प्रदर्शन स्थल पर ही डेरा डाले हुए हैं।
बिहार से दिल्ली तक, इंसाफ की मांग
बिहार के छपरा निवासी अमित कुमार, जो एक डेंटल क्लिनिक में काम करते हैं, अपने दो भतीजों प्रियांशु और सूरज के साथ प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे। दिनभर प्रदर्शन के बाद वे बंगला साहिब गुरुद्वारे के बरामदे में आराम करते नजर आए। दोनों किशोर छात्रों ने साफ कहा कि जब तक सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करती, वे स्कूल नहीं लौटेंगे।
प्रियांशु ने कहा,बिहार में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। अब छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं रहा। उन्होंने 2024 और 2026 के NEET-UG पेपर लीक, BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3.0) और बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का हवाला देते हुए कहा कि यह अब पैसे कमाने का धंधा बन चुका है।वहीं, सूरज ने संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज को याद करते हुए अपने जख्म दिखाए और कहा कि घाव तो भर गए हैं, लेकिन गुस्सा अभी भी बाकी है।
सीबीएसई मूल्यांकन और सीयूईटी पर सवाल
दिल्ली के रोहिणी की 17 वर्षीय लविशा और उनकी दोस्त एंजेल ने सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र पर सवाल उठाए। लविशा ने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है, जो छोटे शहरों के छात्रों के लिए और भी मुश्किल है।एंजेल, जो बी.कॉम की तैयारी कर रही हैं, ने सीयूईटी परीक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा, एग्जाम सेंटर दूर दिए जाते हैं, एडमिट कार्ड देर से मिलता है और कई बार परीक्षा कैंसिल हो जाती है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से शिकायत करना भी मुश्किल हो जाता है।
सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच खाई
उत्तर प्रदेश के झांसी से आए 17 वर्षीय सागर यादव, जो पिछले कुछ हफ्तों से जंतर-मंतर पर ही रह रहे हैं, ने शिक्षा व्यवस्था में असमानता को बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच फीस, सुविधाओं और पढ़ाई के स्तर में भारी अंतर है।सागर का कहना है कि नीट का मुद्दा सिर्फ शुरुआत है, असली समस्या शिक्षा व्यवस्था की खामियों में है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
लाठीचार्ज के बाद और भड़का आंदोलन
जून के अंतिम सप्ताह से छात्र, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकाला, जिसके दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर जुट गए। अब उनकी नई मांग है कि लाठीचार्ज और कार्रवाई का सामना करने वाले छात्रों को न्याय दिया जाए।





