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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव पारित…भारत समेत 135 देशों का मिला समर्थन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद  ने ईरान द्वारा खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और जॉर्डन पर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। अमेरिका की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 15 सदस्यीय परिषद ने 13 मतों के साथ इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। विशेष बात यह रही कि भारत ने न केवल इस प्रस्ताव का समर्थन किया, बल्कि 130 से अधिक अन्य देशों के साथ मिलकर इसे सह-प्रायोजित भी किया। मतदान के दौरान चीन और रूस जैसे वीटो शक्ति संपन्न स्थायी सदस्य अनुपस्थित रहे, जबकि प्रस्ताव के खिलाफ एक भी मत नहीं पड़ा। इस अंतरराष्ट्रीय समर्थन ने ईरान की हालिया सैन्य गतिविधियों के खिलाफ वैश्विक एकजुटता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है।

प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई है कि वह जीसीसी देशों और जॉर्डन के खिलाफ अपने सभी हमलों को तत्काल प्रभाव से रोके। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों को बंद करने या बाधित करने की धमकियों की भी तीखी आलोचना की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, ईरान को अपने छद्म समूहों के माध्यम से की जाने वाली उकसावे वाली कार्रवाइयों को भी “तुरंत और बिना शर्त” बंद करना चाहिए। सदस्य देशों ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वाणिज्यिक पोतों के नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना अनिवार्य है और देशों को हमलों से अपने पोतों की रक्षा करने का पूर्ण अधिकार है।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इस कदम को “ईरानी शासन की क्रूरता के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शांति और कूटनीति के तमाम प्रयास किए, लेकिन ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों का रास्ता चुनकर “लक्ष्मण रेखा” पार कर दी है। प्रस्ताव में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि ईरानी हमलों में रिहायशी इलाकों और असैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया, जिससे आम नागरिक हताहत हुए हैं। बहरीन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव में क्षेत्र की संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति अंतरराष्ट्रीय समर्थन को फिर से पुष्ट किया गया है।

दूसरी ओर, ईरान ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और अवैध करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों में बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक मारे गए हैं और संपत्तियों को नुकसान पहुँचा है। इरावानी ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना केवल रक्षात्मक कार्रवाई थी और ईरान अपने पड़ोसी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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