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प्रदेश सरकार ने दी त्योहारों के आयोजन को सशर्त अनुमति

  • बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं व 10 साल से कम बच्चों को नहीं मिलेगी एंट्री

  • केवल कोरोना लक्षणहीन लोग को ही मिलेगा प्रवेश

  • फेस कवर, हैंड वाश का करना होगा सभी को पालन

  • आरोग्य सेतु का इस्तेमाल होगा अनिवार्य

  • कार्यक्रम स्थल पर करनी आइसोलेशन रूम की व्यवस्था

  • मुख्य सचिव ने जारी की गाइडलाइन

  • नयी गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से हुई लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आने वाले महीनों में पड़ने वाले त्योहारों, ख़ासकर दुर्गा पूजा, बारावफात व क्रिसमस के मद्देनज़र शुक्रवार को सशर्त अनुमति दे दी है। इस दौरान होने वाले प्रतिमा की स्थापना, पूजा, मेला, प्रदर्शनी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संबंध में मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने गाइडलाइन जारी कर दी है। यह गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी हैं। इसमें बड़ी बात यह है कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत त्योहारों में कार्यक्रम स्थल पर 65 साल से ज़्यादा उम्र वाले लोगों, गंभीर बिमारियों वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं और 10 साल से कम उम्र के बच्चों को एंट्री नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें घर पर रहने की सलाह दी जाएगी।

मुख्य सचिव ने सभी मंडलायुक्तों, फील्ड में तैनात पुलिस अधिकारीयों, लखनऊ और नोएडा के पुलिस कमिश्नर और जिले स्तर के अधिकारीयों को भेजे निर्देश में कहा है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच तमाम त्यौहार होंगे जिनमे क्षेत्र विशेष में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कोविड-19 के प्रसार पर नियंत्रण के लिए इन गाइडलाइन का पालन कराया जाये।

तिवारी ने निर्देश दिये हैं कि इन आयोजनों के स्थल में पहले से ही चिन्हित कर उसकी सीमा सुनिश्चित करते हुए विस्तृत साइट प्लान तैयार कर लिया जाये। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखने थर्मल स्कैनिंग और सेनिटाइज़शन की व्यवस्था करना ज़रूरी होगा। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते तय किये जाएं।

केवल उन्ही लोगों को प्रवेश दिया जायेगा जिनमे किसी भी तरह के कोरोना के लक्षण नहीं होंगे। अगर किसी दर्शक में लक्षण दिखेंगे तो उसे अंदर नहीं आने दिया जायेगा। फेस कवर या मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का अनुपालन की निगरानी के लिए सीसीटीवी लगाने पर भी विचार किया जायेगा।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि कन्टेनमेंट जोन में किसी भी तरह त्यौहार से जुडी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। आयोजकों द्वारा जहां तक संभव हो कांटेक्ट लेस्स पेमेंट की व्यवस्था की जाये और कार्यक्रम स्थल पर ‘क्या किया जाये’ और ‘क्या न किया जाये’ का बोर्ड भी लगाया जाये। सभी को आरोग्य सेतु का इस्तेमाल करने की सलाह देनी होगी। कार्यक्रम के दौरान अगर कोई भी व्यक्ति लक्षण वाला पाया जाता है, जब तक चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल जाती है, तब तक के लिए एक आइसोलेशन रूम की व्यवस्था करना भी अनिवार्य होगा।

तिवारी ने कहा है कि मूर्तियां पारम्परिक लेकिन खाली जगह पर ही स्थापित की जाएंगी और उनका आकार छोटा होगा। इसके अलावा मैदान की क्षमता से ज़्यादा लोगों को प्रवेश नहीं मिलेगा। चौराहों और सड़क पर मूर्ति व ताज़िये रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मूर्तियों के विसर्जन में जहां तक संभव हो छोटे वाहन का इस्तेमाल किया जायेगा और उसमे कम से कम लोग ही शामिल रहेंगे। रैली एवं विसर्जन के लिए रूट प्लान, विसर्जन स्थलों का चिन्हांकन, अधिकतम व्यक्तियों की संख्या का निर्धारण, शारीरिक दूरी का पालन जैसे बिंदुओं की पहले से ही योजना बनाकर इसे कड़ाई के साथ लागू कराया जाये।

विसर्जन के समय भीड़ निर्धारित सीमा से अधिक न हो और शारीरिक दूरी व मास्क पहनने के मानकों का पालन ज़रूर कराया जाये और ऐसी रैलियों की संख्या और इसमें दूरी का उचित प्रबंधन कराया जाये। ऐसी रैली या विसर्जन, जिसमें लंबी दूरी तक जाना हो, उनमें एम्बुलेन्स की सेवाएं भी दी जाएं।

मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए हैं कि रामलीला एवं दशहरा से जुडी सामूहिक गतिविधियों को प्रतिबंधों के साथ आयोजित किये जाये। किसी भी बंद जगह, हाल और कमरे की तय क्षमता का 50 प्रतिशत लेकिन अधिकतम 200 व्यक्तियों तक को फेस मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग व सैनिटाइजर एवं हैण्ड वाश की उपलब्धता अनिवार्यता के साथ पालन सुनिश्चित करना होगा। किसी भी खुले स्थान एवं मैदान पर ऐसे स्थानों के क्षेत्रफल के अनुसार फेस मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग व सैनेटाइजर एवं हैण्ड वाश की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाये।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि किसी भी कार्यक्रम जैसे जयंती मेला, प्रतिमा स्थापना एवं विर्सजन, जागरण, रामलीला, प्रदर्शनी, रैली एवं जुलूस आदि के लिए नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिशनर और अन्य जिलों में जिलाधिकारी से अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।

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