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गायन, वादन एवं नृत्य की प्रस्तुतियों ने समां बांधा

भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में ग्रीष्मकालीन मासिक कार्यशाला
24 एवं 25 जून को होंगी भव्य प्रस्तुतियां
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में 26 मई से आरंभ ग्रीष्मकालीन मासिक कार्यशाला के अंतर्गत 24 एवं 25 जून को आयोजित होने वाले समापन प्रदर्शन कार्यक्रम के पूर्व आज पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) का सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। इस पूर्वाभ्यास में विश्वविद्यालय के समस्त विभागों के प्रशिक्षकों ने अपने-अपने विद्यार्थियों के साथ सक्रिय सहभागिता करते हुए पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं उत्साह के साथ अभ्यास किया। कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने हेतु सभी प्रतिभागियों ने निर्धारित प्रस्तुतियों का सूक्ष्मता से अभ्यास किया, जिससे आगामी समापन प्रदर्शन को भव्य, आकर्षक एवं प्रभावशाली बनाया जा सके। पूर्वाभ्यास के दौरान गायन, वादन एवं नृत्य सहित विभिन्न कलात्मक प्रस्तुतियों का क्रमबद्ध एवं समन्वित अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए प्रस्तुति की गुणवत्ता, तालमेल, मंच संचालन एवं अभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इस कार्यशाला के अंतर्गत शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, लोकगीत, तबला, पखावज, ढोलक, सितार, वायलिन, गिटार (वेस्टर्न), बाँसुरी, हारमोनियम, की-बोर्ड, कथक नृत्य, भरतनाट्यम, लोकनृत्य, सारंगी, सरोद, पेंटिंग एवं क्ले मॉडलिंग जैसी विविध विधाओं में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त आॅटिस्टिक बच्चों हेतु नृत्य की विशेष कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जो विश्वविद्यालय की समावेशी एवं संवेदनशील शैक्षिक दृष्टि को दशार्ता है। कार्यक्रम में प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं समर्पण के साथ भाग लिया, जिससे उनकी कला के प्रति लगन एवं सीखने की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। सभी प्रशिक्षकों ने अपने विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रस्तुति हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। 24 एवं 25 जून को ग्रीष्मकालीन कार्यशाला की समापन प्रस्तुति अपराह्न 03:00 बजे से प्रारंभ होगी। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों की रचनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभा के विकास हेतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मंच विद्यार्थियों को आत्मविश्वास प्रदान करते हैं तथा उनकी प्रस्तुति कौशल को निखारते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं प्रशिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि यह पूर्वाभ्यास आगामी समापन कार्यक्रम की सफलता की मजबूत नींव है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को निखारना तथा उन्हें मंचीय प्रस्तुति का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। आगामी 24 एवं 25 जून को आयोजित समापन प्रदर्शन में इन सभी प्रस्तुतियों का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों की प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

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