भंडारों में प्लास्टिक की जगह हरे पत्तलों का वितरण
- गोमती नदी को प्रदूषण से बचाने का लिया संकल्प
- शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर चलाया जागरूकता अभियान
- पंचतत्व संस्था हर मंगलवार करेगी नि:शुल्क वितरण, सामाजिक संगठनों और मीडिया से सहयोग की अपील
लखनऊ। आस्था के पर्व बड़े मंगल पर इस बार पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी पूरे जोर-शोर से गूंजा, जब वाटर वूमेन के नाम से प्रसिद्ध शिप्रा पाठक ने 55 हजार हरे पत्तलों का नि:शुल्क वितरण कर एक नई मिसाल पेश की। उनका यह अभियान न केवल धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आम लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का प्रभावी माध्यम भी बना।
बड़े मंगल के अवसर पर लखनऊ में हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के दोने और पत्तलों का उपयोग होता है, जो बाद में कचरे के रूप में शहर और जलस्रोतों को प्रदूषित करते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए शिप्रा पाठक ने यह अभिनव पहल शुरू की।
सुबह से ही उन्होंने अपनी संस्था पंचतत्व के सदस्यों के साथ शहर के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने प्रेस क्लब, दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर, हजरतगंज, इंदिरानगर, गोमती नगर और हनुमान सेतु सहित कई स्थानों पर आयोजित भंडारों में पहुंचकर आयोजकों और श्रद्धालुओं को हरे पत्तल वितरित किए। साथ ही उन्हें प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
शिप्रा पाठक ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्लास्टिक की पत्तलों में गर्म भोजन परोसने से हानिकारक रसायन निकलते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं। उन्होंने चेताया कि यही प्लास्टिक कचरे के रूप में नालियों और नदियों में पहुंचकर जल प्रदूषण का कारण बनता है। विशेष रूप से उन्होंने गोमती नदी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि हम अभी नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल मिलना कठिन हो जाएगा।
इस अभियान की शुरूआत उन्होंने लखनऊ प्रेस क्लब से की, जहां मीडिया कर्मियों से संवाद कर उन्होंने अपने मिशन को व्यापक बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मीडिया के सहयोग से यह संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकता है और लोगों की सोच में बदलाव लाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने शहर के विभिन्न भंडारा स्थलों पर जाकर न केवल हरे पत्तल वितरित किए, बल्कि लोगों को यह संकल्प भी दिलाया कि वे भविष्य में प्लास्टिक युक्त पत्तलों का उपयोग नहीं करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने इस पहल का समर्थन किया और इसे एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
शिप्रा पाठक ने घोषणा की कि उनकी संस्था पंचतत्व इस अभियान को निरंतर जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि हर मंगलवार को इसी प्रकार नि:शुल्क हरे दोना-पत्तल का वितरण किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था इस अभियान में भाग लेना चाहती है, वह उनसे संपर्क कर सकती है। उन्होंने सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से भी अपील की कि वे इस अभियान में सहयोग करें। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही लखनऊ को प्लास्टिक मुक्त शहर बनाया जा सकता है।
इस पहल के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने शिप्रा पाठक के प्रयासों की सराहना की और इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया। भंडारा आयोजकों ने भी आश्वासन दिया कि वे भविष्य में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को अपनाने का प्रयास करेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, हरे पत्तल पूरी तरह जैविक होते हैं और आसानी से नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसके विपरीत, प्लास्टिक कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और भूमि तथा जल दोनों को प्रदूषित करता है। इससे पूर्व में भी वाटर वुमन एक थैला एक थाली का अभियान महाकुंभ में चलाकर कचरे के प्रबंध को नियोजित कर चुकी है।
इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए पंचतत्व संस्था के लोग गोरखपुर,कानपुर, प्रयाग, कन्नौज, अयोध्या, हरदोई, सुल्तानपुर, रायबरेली से पहुंचे।





