सीजफायर कागजी साबित होता दिख रहा है क्योंकि इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। दक्षिण लेबनान पर इजरायल के ताजा हमले में 17 लोगों की मौत हो गई, जिसे युद्धविराम के दौरान हुए सबसे घातक हमलों में से एक बताया जा रहा है। लेबनान सरकार के मुताबिक गुरुवार से अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 110 हो गई है, जबकि देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2 मार्च से अब तक कुल मृतकों का आंकड़ा 2600 से ज्यादा बताया है।
इजरायल का कहना है कि इसी अवधि में उसके 17 सैनिक भी मारे गए हैं। उसने आरोप लगाया है कि हिजबुल्लाह ने उस पर सैकड़ों रॉकेट और ड्रोन हमले किए हैं। वहीं हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर सीजफायर के उल्लंघन का आरोप लगाया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जिससे युद्धविराम लागू करने की कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं।
इस बीच, अमेरिका में इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत जारी है। दशकों बाद राजदूत स्तर की यह वार्ता अहम मानी जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इजरायल से अपील की है कि किसी भी नई बातचीत से पहले युद्धविराम को पूरी तरह लागू किया जाए।
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम ने कूटनीतिक प्रयासों को खारिज करते हुए कहा कि बिना ठोस नतीजों के सीधी बातचीत करना एकतरफा रियायत देने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को राजनीतिक फायदा होता है और यह अमेरिका की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है।
हिजबुल्लाह ने साफ किया है कि वह अपने हमले जारी रखेगा। संगठन के मुताबिक उसने दक्षिणी लेबनान के कई सीमावर्ती इलाकों में इजरायली सैनिकों और ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें बिंत जबील, हुला गांव और बियादा जैसे इलाकों में तोपखाने और ड्रोन से किए गए हमले शामिल हैं।
लगातार बढ़ती हिंसा और दोनों पक्षों के कड़े रुख के चलते हालात और बिगड़ने की आशंका है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही बातचीत के बावजूद जमीन पर शांति की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही।





